वॉशिंगटन, अमेरिका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य हमला करने की तैयारी में था, लेकिन संभावित कार्रवाई से ठीक पहले ईरान ने बातचीत के लिए संपर्क किया। ट्रंप का कहना है कि अमेरिकी सैन्य दबाव और संभावित हमले की आशंका के कारण ईरान को वार्ता का रास्ता अपनाना पड़ा।
लास वेगास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान के अधिकारियों ने उन्हें फोन कर अनुरोध किया कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई न करे और दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकालें। ट्रंप ने कहा कि यदि यह पहल नहीं होती तो अमेरिका बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू कर सकता था। हालांकि उन्होंने इस कथित ऑपरेशन की समय-सीमा, सैन्य रणनीति या अन्य तकनीकी विवरण साझा नहीं किए।
अमेरिका और ईरान के बीच कई दशकों से तनाव बना हुआ है। 1979 की ईरानी क्रांति के बाद दोनों देशों के रिश्तों में लगातार खटास रही है। इसके बाद परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा, मिसाइल कार्यक्रम और पश्चिम एशिया में प्रभाव को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार टकराव की स्थिति बनी। समय-समय पर अमेरिका ने ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए, जबकि ईरान ने भी अमेरिकी नीतियों का विरोध किया।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया पहले से ही कई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच किसी बड़े सैन्य संघर्ष की स्थिति पैदा होती है तो उसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है। मध्य पूर्व दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है, इसलिए किसी भी बड़े संघर्ष से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
विश्लेषकों का यह भी मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी चुनौती बन सकता है। ऐसे हालात में कूटनीतिक समाधान को सबसे बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
समाचार लिखे जाने तक ईरान की ओर से ट्रंप के दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। इसलिए इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार की बातचीत क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। अब दुनिया की नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान की ओर से इस मुद्दे पर क्या आधिकारिक रुख सामने आता है और क्या दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद आगे बढ़ता है।










