नई दिल्ली, दिल्ली
भारतीय सेना के टी-72 और टी-90 टैंकों की परिचालन क्षमता को और मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा समझौता किया है। मंत्रालय ने इन टैंकों के लिए सहायक विद्युत इकाइयों यानी Auxiliary Power Units (APU) की खरीद के लिए एक्यूरेट इंडस्ट्रियल कंट्रोल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ 586 करोड़ रुपये का करार किया है।
यह समझौता 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हुआ। इस डील का उद्देश्य टैंकों की परिचालन तत्परता और विश्वसनीयता को बेहतर बनाना है।
एपीयू टैंक के लिए एक वैकल्पिक विद्युत स्रोत के रूप में काम करता है। इसकी मदद से मुख्य इंजन बंद रहने की स्थिति में भी टैंक के कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को आवश्यक बिजली मिलती रह सकती है।
इन प्रणालियों में फायर कंट्रोल सिस्टम, फायरिंग सर्किट, गन स्टेबिलाइजेशन सिस्टम और अन्य सहायक उपकरण शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि टैंक को हर समय मुख्य इंजन चालू रखने की जरूरत कम होगी और जरूरी प्रणालियां स्वतंत्र विद्युत आपूर्ति के जरिए संचालित की जा सकेंगी।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, स्वदेशी रूप से विकसित एपीयू को टी-72 और टी-90 टैंकों में शामिल किए जाने से भारतीय सेना की मशीनीकृत इकाइयों की संचालन क्षमता को मजबूती मिलेगी। इससे टैंकों की विश्वसनीयता और स्थायित्व बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
इस समझौते को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्वदेशी तकनीक के इस्तेमाल से भारतीय सेना की जरूरतों को देश में विकसित समाधानों के जरिए पूरा करने की क्षमता बढ़ेगी।
टी-72 और टी-90 भारतीय सेना के बख्तरबंद बेड़े का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में इन टैंकों में आधुनिक सहायक प्रणालियों को शामिल करना सेना की दीर्घकालिक परिचालन तैयारियों के लिए अहम माना जा रहा है।












