जयपुर, राजस्थान। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने केंद्र की भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की नीतियों और फैसलों में स्थिरता की कमी दिखाई देती है। सरकार पहले बड़े फैसले लेती है और बाद में उन्हें वापस लेने पर मजबूर हो जाती है। इससे आम जनता, किसानों और युवाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने तीन कृषि कानूनों, जातिगत जनगणना और अग्निवीर योजना का उदाहरण देते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान सचिन पायलट ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों को करीब डेढ़ साल तक आंदोलन करना पड़ा था। इसके बाद सरकार को तीनों कानून वापस लेने पड़े। वहीं, अग्निवीर योजना को लेकर युवाओं के भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसने पहले ऐसे फैसले क्यों लिए और बाद में उन्हें बदलने की जरूरत क्यों पड़ी।
बेरोजगारी और महंगाई को लेकर सरकार पर निशाना
पायलट ने कहा कि देश में बेरोजगारी और महंगाई से युवा परेशान हैं। किसानों के बीच भी सरकार की नीतियों को लेकर असंतोष है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को केंद्र में शासन करने के लिए 12 साल का अवसर मिला, लेकिन आम लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। उनके अनुसार, जनता अब बदलाव चाहती है और भाजपा की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।
एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से करोड़ों नाम हटाने की कोशिश लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ है।
पायलट ने इस प्रक्रिया को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक के मतदान के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए। मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए।
पंजाब में कांग्रेस और आप के बीच मुकाबले की बात
पंजाब के राजनीतिक हालात पर सचिन पायलट ने कहा कि आम आदमी पार्टी कमजोर हो रही है। उन्होंने आगामी राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच मुख्य मुकाबला होने की संभावना जताई।
संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का लगाया आरोप
सचिन पायलट ने भाजपा पर संवैधानिक संस्थाओं और जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बेहद जरूरी है।
पायलट के इस बयान के बाद केंद्र सरकार की नीतियों, बेरोजगारी, महंगाई और चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है।











