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‘मेलोडी’ से फिर चर्चा में आई 100 साल पुरानी Parle, जानिए कैसे मोहनलाल दयाल ने खड़ा किया देश का सबसे बड़ा बिस्किट ब्रांड

Narendra Modi द्वारा इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni को ‘मेलोडी’ टॉफी गिफ्ट किए जाने के बाद एक बार फिर देश की मशहूर कंपनी Parle Products चर्चा में आ गई है। सोशल मीडिया पर ‘मेलोडी’ ट्रेंड के साथ अब लोग इस भारतीय ब्रांड के इतिहास और उसके संस्थापक मोहनलाल दयाल चौहान के बारे में भी जानना चाह रहे हैं।

करीब 100 साल पुरानी इस कंपनी की शुरुआत 1929 में हुई थी। उस दौर में भारत में ज्यादातर खाद्य उत्पाद विदेशों से आयात होते थे और बिस्किट जैसी चीजें आम लोगों की पहुंच से बाहर मानी जाती थीं। ऐसे समय में मोहनलाल दयाल चौहान ने स्वदेशी सोच के साथ भारतीय बाजार में अपनी पहचान बनाने का फैसला किया।

उन्होंने जर्मनी से बिस्किट बनाने की मशीनें मंगवाईं और करीब 60 हजार रुपये का निवेश कर मुंबई के विले पार्ले इलाके में एक छोटी फैक्ट्री शुरू की। उस समय यह रकम बेहद बड़ी मानी जाती थी। अपने पांच बेटों—मानेकलाल, पीतांबर, नरोत्तम, कांतिलाल और जयंतीलाल—के साथ मिलकर उन्होंने इस कारोबार को आगे बढ़ाया।

कंपनी का नाम भी विले पार्ले इलाके से प्रेरित होकर ‘पारले’ रखा गया। शुरुआत में कंपनी टॉफी और कैंडी बनाती थी, लेकिन असली पहचान उसे ग्लूकोज बिस्किट से मिली।

ग्लूकोज बिस्किट ने बदली किस्मत

1939 में कंपनी ने ग्लूकोज बिस्किट का उत्पादन शुरू किया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना को बिस्किट सप्लाई करने का लाइसेंस मिलने से कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ा। धीरे-धीरे पारले के बिस्किट देशभर में लोकप्रिय होने लगे।

आजादी के बाद कंपनी ने विदेशी ब्रांडों के भारतीय विकल्प के रूप में खुद को स्थापित किया। शुरुआती दौर में इसका बिस्किट ‘पारले ग्लूको’ नाम से बिकता था, लेकिन 1960 के दशक में बाजार में कई समान नाम आने लगे। इसके बाद कंपनी ने इसका नाम बदलकर Parle-G कर दिया। यहां ‘G’ का मतलब ग्लूकोज था।

रेलवे स्टेशन, चाय की दुकान, स्कूल बैग और घरों तक पहुंचने वाला Parle-G धीरे-धीरे भारतीय परिवारों का हिस्सा बन गया। 2011 में एक ग्लोबल रिसर्च रिपोर्ट में इसे दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट ब्रांड भी बताया गया था।

1983 में आई ‘मेलोडी’, विज्ञापन ने बना दिया सुपरहिट

Melody चॉकलेट को कंपनी ने 1983 में लॉन्च किया था। 80 और 90 के दशक में इसका विज्ञापन और टैगलाइन लोगों की जुबान पर चढ़ गई—“मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है?”

यही वजह है कि दशकों बाद भी यह टॉफी भारतीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए है। पीएम मोदी द्वारा Giorgia Meloni को ‘मेलोडी’ गिफ्ट करने के बाद यह ब्रांड फिर से सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा है।

आज Parle Products सिर्फ बिस्किट या टॉफी बनाने वाली कंपनी नहीं, बल्कि भारतीय FMCG सेक्टर की सबसे बड़ी और भरोसेमंद कंपनियों में गिनी जाती है।

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