रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक अहम खुलासा किया है। केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि रूस विदेशी नागरिकों को अपनी सेना में भर्ती करने के लिए भारी वेतन, बोनस, नागरिकता और अन्य आकर्षक सुविधाओं का लालच दे रहा है। सरकार के मुताबिक इसी वजह से कई भारतीय नागरिक भी रूसी सेना में शामिल हुए।
सरकार की ओर से पेश किए गए हलफनामे में कहा गया कि रूसी सेना में शामिल होने वाले लोगों को करीब 5,000 अमेरिकी डॉलर का साइनिंग बोनस और हर महीने लगभग 2,500 डॉलर वेतन देने का प्रस्ताव दिया गया। इसके अलावा रूसी नागरिकता, सामाजिक सुरक्षा और युद्ध में मौत होने पर 1.68 लाख डॉलर तक के मुआवजे का भी वादा किया गया।
सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया गया कि कुछ भारतीय छात्रों और युवाओं ने आर्थिक मजबूरी या अन्य कारणों से सैन्य अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए। इनमें किशोर सरवनन और साहिल महामदुसेन मजोथी का मामला भी शामिल है। दोनों रूस में नारकोटिक्स मामलों में जेल में थे और सजा माफ होने की उम्मीद में सेना में भर्ती हो गए।
सरकार ने कहा कि भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय लगातार ऐसे मामलों पर नजर बनाए हुए हैं। किशोर सरवनन को भारत सरकार के हस्तक्षेप के बाद रूसी सेना से रिहा कराया गया, हालांकि बाद में उसने रूस में ही रहने और नागरिकता लेने का फैसला किया। वहीं साहिल मजोथी के बारे में जानकारी दी गई कि उसने कथित तौर पर यूक्रेनी सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।
केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि याचिका में शामिल 26 भारतीयों में से 14 की मौत हो चुकी है जबकि 11 लोग अभी भी लापता हैं। एक अन्य व्यक्ति को छेड़छाड़ के मामले में रूस में आठ साल की सजा सुनाई गई है। सरकार ने कहा कि संघर्ष वाले इलाकों में हालात बेहद खराब हैं, इसलिए शवों को बरामद करना आसान नहीं है।
लापता लोगों की पहचान और खोज के लिए भारत सरकार ने परिजनों के डीएनए सैंपल रूसी अधिकारियों को भेजे हैं। अब तक 21 परिवारों के नमूने साझा किए जा चुके हैं।
सरकार ने यह भी बताया कि इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड के जरिए अब तक 48 भारतीयों को हवाई टिकट और अन्य सहायता दी गई है। मृतकों के परिवारों को मुआवजा दिलाने के लिए भी भारत सरकार रूस के साथ लगातार संपर्क में है। अब तक कई परिवारों को मुआवजा राशि मिल चुकी है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध लंबे समय से जारी है और दुनिया भर से विदेशी नागरिकों की भर्ती को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।










