नई दिल्ली
बाजार में उपलब्ध ठंडे मीठे उत्पादों की बढ़ती विविधता के बीच आइसक्रीम और फ्रोजन डेजर्ट को लेकर लोगों में अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती है। दोनों देखने में लगभग एक जैसे लगते हैं, लेकिन इनकी सामग्री, निर्माण प्रक्रिया, स्वाद और कीमत में महत्वपूर्ण अंतर होता है। ऐसे में सही जानकारी उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प चुनने में मदद कर सकती है।
आइसक्रीम बनाने में दूध, क्रीम और मिल्क फैट का उपयोग किया जाता है। मिल्क फैट ही आइसक्रीम को उसका मलाईदार स्वाद और मुलायम बनावट देता है। दूसरी ओर, फ्रोजन डेजर्ट में मिल्क फैट की जगह पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल या अन्य वनस्पति तेलों का इस्तेमाल किया जाता है। इसी वजह से इसकी बनावट और स्वाद आइसक्रीम से थोड़ा अलग होता है।
स्वाद के लिहाज से आइसक्रीम अधिक रिच और क्रीमी महसूस होती है। यह मुंह में जल्दी पिघल जाती है। वहीं फ्रोजन डेजर्ट में वेजिटेबल फैट होने के कारण हल्की चिकनाई का एहसास हो सकता है और उसका मेल्टिंग पैटर्न भी अलग होता है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने उपभोक्ताओं को भ्रमित होने से बचाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यदि किसी उत्पाद में निर्धारित सीमा से अधिक वेजिटेबल ऑयल का इस्तेमाल किया गया है, तो उसे “Ice Cream” नहीं बल्कि “Frozen Dessert” के रूप में ही बेचा जा सकता है। कंपनियों के लिए पैकेट पर सही लेबल देना अनिवार्य है।
कीमत में भी दोनों के बीच अंतर देखा जा सकता है। डेयरी फैट की लागत अधिक होने के कारण आइसक्रीम सामान्यतः महंगी होती है, जबकि वेजिटेबल फैट अपेक्षाकृत सस्ता होने से फ्रोजन डेजर्ट की कीमत कम हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय केवल ब्रांड या पैकेजिंग नहीं, बल्कि इंग्रीडिएंट्स की सूची भी ध्यान से पढ़नी चाहिए। यदि सामग्री में मिल्क फैट का उल्लेख है तो वह आइसक्रीम है, जबकि पाम ऑयल या वेजिटेबल फैट लिखा होने पर वह फ्रोजन डेजर्ट होगा। सही जानकारी के आधार पर किया गया चुनाव स्वास्थ्य और गुणवत्ता दोनों के लिहाज से बेहतर साबित हो सकता है।











