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‘पहले अपनी नाकामियों का जवाब दें’, अमित शाह की माफी की मांग पर कांग्रेस का पलटवार

नई दिल्ली, दिल्ली

‘वंदे मातरम्’ के कथित अपमान को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से कांग्रेस से माफी की मांग किए जाने के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर पलटवार किया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि इस मुद्दे के जरिए सरकार अपनी कथित नाकामियों से जनता का ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है।

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अमित शाह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि गृह मंत्री अपनी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की नाकामियों पर चर्चा से बचने के लिए ‘वंदे मातरम्’ विवाद को आगे बढ़ा रहे हैं।

कांग्रेस नेता ने शाह के पुराने बयानों का भी उल्लेख किया। रमेश ने आरोप लगाया कि 17 दिसंबर 2024 को राज्यसभा में अमित शाह ने डॉ. बीआर आंबेडकर के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की थी। कांग्रेस इस बयान को लेकर पहले भी भाजपा पर हमला कर चुकी है।

रमेश ने राष्ट्रीय ध्वज को लेकर भी भाजपा और उसके वैचारिक संगठन पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि जनवरी 2002 तक संगठन के मुख्यालय पर तिरंगा फहराने की परंपरा नहीं थी। कांग्रेस नेता ने कहा कि राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान की बात करने से पहले भाजपा को अपने इतिहास पर भी विचार करना चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी अमित शाह की मांग पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ का स्वतंत्रता आंदोलन से गहरा संबंध है और कांग्रेस ने आजादी की लड़ाई के दौरान इस गीत को जनभावना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस के लिए ‘वंदे मातरम्’ केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है। उन्होंने भाजपा पर इस ऐतिहासिक प्रतीक का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

भाजपा की ओर से हालांकि कांग्रेस के इन आरोपों को खारिज किया जाता रहा है। पार्टी का रुख है कि राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। अमित शाह की माफी की मांग इसी राजनीतिक रुख का हिस्सा है।

वंदे मातरम् विवाद के बहाने एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। कांग्रेस सरकार पर मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगा रही है, जबकि भाजपा कांग्रेस से राष्ट्रीय भावना से जुड़े मुद्दे पर जवाब मांग रही है।

राजनीतिक तौर पर यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब दोनों दल स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रवाद की विरासत को लेकर एक-दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं।

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