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जयशंकर का चीन को कड़ा संदेश, बोले- बेहतर रिश्तों के लिए सीमा पर शांति पहली शर्त

नई दिल्ली, दिल्ली:

विदेश मत्री एस. जयशंकर ने चीन को दो टूक संदेश देते हुए कहा है कि भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता सबसे पहली और बुनियादी शर्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति का सीधा प्रभाव दोनों देशों के राजनीतिक, कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों पर पड़ता है।

जयशंकर ने कहा कि वर्ष 2020 की गर्मियों से लेकर के शरद ऋतु तक भारत और चीन के रिश्तों में तनाव बना रहा। इसकी मुख्य वजह सीमा पर उत्पन्न गतिरोध था। सीमा पर तनाव बढ़ने के कारण दोनों देशों के बीच सामान्य संबंधों को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया था।

हालांकि, पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक क्षेत्रों से जुड़े समझौतों के बाद कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के नए रास्ते खुले हैं। इन समझौतों के बाद सीमा पर स्थिरता और दोनों देशों के बीच रिश्तों में सुधार की उम्मीद बढ़ी है।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत को बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में आत्मविश्वास के साथ व्यापार करना होगा। उन्होंने कहा कि चीन सहित दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को राष्ट्रीय हितों और भारत की आर्थिक क्षमता को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाना जरूरी है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को अपनी विनिर्माण क्षमता, तकनीकी शक्ति और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी बढ़ानी होगी। पिछले वर्षों में जिन क्षेत्रों में देश अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया, उन कमियों को अब दूर करना होगा।

जयशंकर ने कहा कि मजबूत और आत्मनिर्भर भारत ही वैश्विक मंच पर बड़ी शक्तियों के साथ बराबरी के आधार पर अपनी बात रख सकता है। आत्मनिर्भरता के साथ वैश्विक व्यापार और आर्थिक साझेदारी में सक्रिय भागीदारी भारत के लिए महत्वपूर्ण होगी।

अमेरिका और चीन के संबंधों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों महाशक्तियों के बीच एक जटिल संबंध है। एक ओर दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा है, वहीं दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में सहयोग भी होता है। भारत के लिए ऐसे अंतरराष्ट्रीय समीकरणों का मूल्यांकन करने का सबसे महत्वपूर्ण आधार राष्ट्रीय हित है।

पाकिस्तान को लेकर जयशंकर ने कहा कि वह दुनिया में एक ऐसा अलग उदाहरण है, जो किसी पड़ोसी पर दबाव बनाने और हमला करने के लिए व्यवस्थित और लगातार आतंकवाद का इस्तेमाल करता है।

बांग्लादेश के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि किसी भी द्विपक्षीय रिश्ते को सफल होने के लिए आपसी हित की कसौटी पर खरा उतरना चाहिए। भारत की विदेश नीति में राष्ट्रीय हित और रणनीतिक स्वायत्तता आगे भी महत्वपूर्ण आधार बने रहेंगे।

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