हाइलाइट्स:
- हाई कोर्ट की युगलपीठ ने शासन की तीन अपीलें खारिज कीं
- डीपीई को डीएड और डीएलएड के समकक्ष मान्यता का आधार मिला
- प्राथमिक से माध्यमिक शिक्षक पदोन्नति का रास्ता हुआ साफ
जबलपुर, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की युगलपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), नई दिल्ली से प्राप्त दो वर्षीय डीपीई (डिप्लोमा इन प्राइमरी एजुकेशन) को माध्यमिक शिक्षक पद पर नियुक्ति तथा प्राथमिक शिक्षक से माध्यमिक शिक्षक पद पर पदोन्नति के लिए मान्य योग्यता माना है।
न्यायालय ने राज्य शासन की ओर से दायर तीन रिट अपीलों को निरस्त करते हुए एकलपीठ के पूर्व निर्णय को बरकरार रखा। इस फैसले से प्रदेशभर में डीपीई डिप्लोमा धारक अभ्यर्थियों और कार्यरत शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
मामले के अनुसार, विभाग ने कुछ अभ्यर्थियों और शिक्षकों की नियुक्ति अथवा पात्रता पर यह कहते हुए आपत्ति उठाई थी कि इग्नू से प्राप्त दो वर्षीय डीपीई डिप्लोमा मान्य नहीं है। इसके आधार पर नियुक्तियां भी प्रभावित हुई थीं। इस निर्णय को चुनौती देते हुए संबंधित अभ्यर्थी न्यायालय पहुंचे थे।
अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता सत्येंद्र ज्योतिषी, अभिषेक मिश्रा, अनुज मिश्रा और अंकित तिवारी ने पैरवी की। उन्होंने न्यायालय के समक्ष कहा कि मध्य प्रदेश शासन ने 28 फरवरी 2013 को जारी एक परिपत्र के माध्यम से इग्नू के दो वर्षीय डीपीई डिप्लोमा को डीएड और डीएलएड के समकक्ष मान्यता दी थी।
वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि बाद के समय में इस मान्यता को विधिवत वापस लेने या समाप्त करने के संबंध में कोई ऐसा आधार उपलब्ध नहीं है, जिसके आधार पर डीपीई डिप्लोमा को अमान्य ठहराया जा सके।
युगलपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद माना कि इग्नू से प्राप्त दो वर्षीय डीपीई एक मान्यता प्राप्त व्यावसायिक डिप्लोमा है और निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के संदर्भ में इसे समकक्ष माना जाना आवश्यक है।
हाई कोर्ट ने राज्य शासन की तीनों रिट अपीलों को खारिज कर दिया। फैसले के बाद डीपीई धारक अभ्यर्थियों के लिए माध्यमिक शिक्षक पद पर नियुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो गया है। साथ ही, डीपीई धारक प्राथमिक शिक्षकों के लिए माध्यमिक शिक्षक पद पर पदोन्नति की संभावना भी मजबूत हुई है।
यह फैसला शिक्षक भर्ती और पदोन्नति से जुड़े ऐसे अभ्यर्थियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनकी पात्रता डीपीई डिप्लोमा को लेकर विवाद में थी।











