नई दिल्ली, दिल्ली। आम आदमी को आने वाले दिनों में प्याज की बढ़ती कीमतों का एक और झटका लग सकता है। गर्मी के मौसम में खरीदे गए प्याज के बफर स्टॉक का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा सड़ने और अंकुरित होने के कारण खराब हो चुका है। इसके साथ ही खरीफ प्याज की फसल में देरी ने आने वाले महीनों में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने दिल्ली में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ रवाना की है। करीब 500 टन प्याज लेकर विशेष ट्रेन लासलगांव से दिल्ली के लिए रवाना हुई। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन को पहले मंगलवार को रवाना होना था, लेकिन प्याज की ग्रेडिंग और सॉर्टिंग में देरी के कारण इसे लगभग 24 घंटे बाद रवाना किया गया।
नाफेड के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इस बार प्याज के ज्यादा खराब होने की प्रमुख वजह कटाई के मौसम में हुई बेमौसम बारिश है। बारिश से प्याज की गुणवत्ता प्रभावित हुई, जिससे उसकी शेल्फ-लाइफ कम हो गई और लंबे समय तक सुरक्षित भंडारण करना मुश्किल हो गया। सामान्य वर्षों में करीब 20 प्रतिशत प्याज खराब होता है, लेकिन इस बार नुकसान का स्तर अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है।
कई शहरों में प्याज की खुदरा कीमतें 50 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने के बाद केंद्र सरकार ने बाजार में हस्तक्षेप बढ़ाया है। दिल्ली के लिए रेल के अलावा सड़क मार्ग से भी प्याज भेजा जा रहा है। नाफेड ने ट्रकों के जरिए प्याज की खेप भेजी, जबकि एनसीसीएफ की ओर से भी अतिरिक्त आपूर्ति की व्यवस्था की गई है।
केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने बताया कि कांदा एक्सप्रेस के माध्यम से आने वाले प्याज को दिल्ली में नाफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार के आउटलेट्स पर 35 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार अन्य बड़े खपत वाले शहरों में भी रेल के जरिए प्याज पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है।
बफर स्टॉक की स्थिति भी सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। केंद्र ने गर्मियों में 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन नाफेड और एनसीसीएफ मिलकर केवल करीब 1.20 लाख टन ही खरीद सके। किसानों के पास मौजूद पुराना स्टॉक भी तेजी से कम हो रहा है, क्योंकि कई किसानों ने प्याज खराब होने के डर से जून और जुलाई में ही अपना स्टॉक बाजार में बेच दिया।
अधिकारियों के अनुसार, नासिक जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में किसानों के पास अब सीमित मात्रा में स्टॉक बचा है। दूसरी ओर, थोक बाजार में बेहतर कीमत मिलने के कारण कई किसान सरकारी खरीद एजेंसियों की बजाय खुले बाजार में प्याज बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
खरीफ प्याज की बुवाई में देरी से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। नया प्याज नवंबर के मध्य तक बाजार में आने की उम्मीद है और नियमित आवक दिसंबर से शुरू हो सकती है। ऐसे में सितंबर और अक्टूबर के दौरान पुराना स्टॉक ही बाजार की मुख्य जरूरत पूरी करेगा। यदि मौजूदा स्टॉक तेजी से खराब हुआ या समय से पहले खत्म हुआ, तो प्याज की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।












