नई दिल्ली, दिल्ली
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित दो दिवसीय BRICS सम्मेलन का रविवार को समापन हो गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण आयोजन में जहां कई देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए, वहीं देश के विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की गैर-मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। सम्मेलन के दौरान आयोजित रात्रिभोज में भी विपक्षी मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी नहीं दिखाई दी।
जानकारी के मुताबिक, सम्मेलन में शामिल होने के लिए देश के सभी मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया था। इसके बावजूद गैर-भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से जुड़े छह मुख्यमंत्री बैठक में शामिल हुए।
विपक्षी मुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक राजनीतिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश से जुड़े सूत्रों के अनुसार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपने पहले से निर्धारित कार्यक्रमों के कारण BRICS सम्मेलन में शामिल नहीं हो सके।
कांग्रेस ने सम्मेलन के नतीजों पर उठाए सवाल
BRICS सम्मेलन समाप्त होने के बाद कांग्रेस ने इसके परिणामों और नई दिल्ली घोषणापत्र को लेकर सवाल उठाए। पार्टी ने घोषणापत्र में चीन के कब्जे और आतंकवादी हमले जैसे मुद्दों पर भारत के रुख को लेकर स्पष्टता की कमी का आरोप लगाया।
कांग्रेस की ओर से सम्मेलन को लेकर केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल खड़े किए गए। पार्टी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के हितों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को अधिक स्पष्ट और प्रभावी रुख रखना चाहिए।
वहीं, सरकार और भाजपा की ओर से BRICS सम्मेलन को भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और कूटनीतिक प्रभाव के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया गया है। सम्मेलन में वैश्विक सहयोग, आर्थिक विकास, आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रयास और ग्लोबल साउथ की भूमिका जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
BRICS के विस्तार और बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच नई दिल्ली में आयोजित यह सम्मेलन भारत के लिए कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा। हालांकि, सम्मेलन के दौरान विपक्षी मुख्यमंत्रियों की अनुपस्थिति और इसके बाद कांग्रेस की आलोचना ने देश की घरेलू राजनीति में भी इस आयोजन को चर्चा का विषय बना दिया।












