Home » मनोरंजन » मंदाकिनी का ‘सुन साहिबा सुन’ क्यों है खास? 41 साल पुराने गाने में दिखी थी पहाड़ी लोक संस्कृति की खूबसूरत झलक

मंदाकिनी का ‘सुन साहिबा सुन’ क्यों है खास? 41 साल पुराने गाने में दिखी थी पहाड़ी लोक संस्कृति की खूबसूरत झलक

मुंबई, महाराष्ट्र

वेटरन अभिनेत्री मंदाकिनी हिंदी सिनेमा की उन अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिन्हें दर्शक आज भी उनकी फिल्मों और यादगार गीतों के लिए याद करते हैं। साल 1985 में रिलीज हुई फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ ने उन्हें खास पहचान दिलाई थी। इस फिल्म के गीत भी काफी लोकप्रिय हुए और आज तक संगीत प्रेमियों के बीच सुने जाते हैं।

फिल्म का एक लोकप्रिय गीत ‘सुन साहिबा सुन’ मंदाकिनी पर फिल्माया गया था। इस गीत को लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज दी थी। खास बात यह है कि गीत के फिल्मांकन में हिमालयी और पहाड़ी लोक संस्कृति की झलक देखने को मिलती है।

गीत में पहाड़ी क्षेत्र की पारंपरिक वेशभूषा और नृत्य को प्रमुखता से दिखाया गया था। यही वजह है कि यह गीत सामान्य फिल्मी गीतों से कुछ अलग नजर आता है। मंदाकिनी का अंदाज और फिल्मांकन ने इसकी खूबसूरती को और बढ़ाया।

‘सुन साहिबा सुन’ के संगीत की जिम्मेदारी रवींद्र जैन ने संभाली थी। वहीं, इसके बोल मशहूर गीतकार हसरत जयपुरी ने लिखे थे। लता मंगेशकर की आवाज, रवींद्र जैन का संगीत और हसरत जयपुरी के शब्दों के मेल ने इस गीत को यादगार बना दिया।

‘राम तेरी गंगा मैली’ रही म्यूजिकल हिट

राज कपूर के निर्देशन में बनी ‘राम तेरी गंगा मैली’ में मंदाकिनी के साथ राजीव कपूर मुख्य भूमिका में थे। फिल्म की कहानी के साथ-साथ इसके संगीत को भी दर्शकों ने काफी पसंद किया। फिल्म के कई गीत लोकप्रिय हुए और इसकी पहचान एक म्यूजिकल हिट के तौर पर बनी।

‘सुन साहिबा सुन’ भी फिल्म की खास पहचान बना। गीत में मंदाकिनी की अदाकारी, पहाड़ी संस्कृति से जुड़े दृश्य और लता मंगेशकर की आवाज का संयोजन दर्शकों को खूब पसंद आया।

आज 41 साल बाद भी यह गीत पुराने हिंदी फिल्म संगीत के प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय है और मंदाकिनी के फिल्मी सफर के यादगार गीतों में इसकी गिनती होती है।

संबंधित समाचार
E-Paper image 2