अंबाला, हरियाणा। पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच दोबारा गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हरियाणा के अंबाला में एक कार्यक्रम के दौरान पंजाब में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनाने की अपील की। उनके बयान में भाजपा से एनडीए का उल्लेख करने के बदलाव ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दिया है।
अमित शाह ने अपने संबोधन में पंजाब के किसानों और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मांग का मुद्दा उठाया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने किसानों को एमएसपी की गारंटी देने के नाम पर केवल झूठा आश्वासन दिया। इसके बाद उन्होंने हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य में 24 फसलों की एमएसपी पर खरीद की जा रही है।
शाह ने पहले पंजाब में भाजपा की सरकार बनाने की बात कही, लेकिन तुरंत अपनी बात सुधारते हुए एनडीए की सरकार बनाने की अपील की। इसी घटनाक्रम को अकाली दल की संभावित वापसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
25 साल पुराना गठबंधन क्यों टूटा था?
भाजपा और अकाली दल 1990 के दशक के मध्य से सितंबर 2020 तक करीब 25 वर्षों तक गठबंधन में रहे। दोनों दलों के बीच सीटों का बंटवारा भी तय था। अकाली दल को ग्रामीण और किसान वर्ग में समर्थन हासिल था, जबकि भाजपा का प्रभाव शहरी क्षेत्रों में था।
सितंबर 2020 में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने एनडीए से नाता तोड़ लिया था। बाद में किसान आंदोलन के बीच इन कानूनों को वापस ले लिया गया।
चुनावी आंकड़ों ने बढ़ाई गठबंधन की अहमियत
2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में अकाली दल को तीन और भाजपा को दो सीटें मिली थीं। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को पंजाब में कोई सीट नहीं मिली, जबकि अकाली दल ने बठिंडा सीट जीती थी। भाजपा का वोट प्रतिशत लगभग 18.5 और अकाली दल का करीब 13 प्रतिशत रहा।
फिलहाल भाजपा की ओर से सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी की बात कही गई है। दोनों दलों ने किसी नए गठबंधन की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में अमित शाह के बयान के बाद पंजाब में संभावित राजनीतिक समीकरणों पर नजरें टिकी हैं।












