बक्सर, बिहार। बक्सर जिले के रघुनाथपुर रेलवे स्टेशन के पास प्रस्तावित रेल ओवरब्रिज निर्माण परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। परियोजना के लिए कुल 0.81 एकड़ जमीन की जरूरत है। संशोधित भूमि अधिग्रहण अधिसूचना में 66 निजी और 11 सरकारी भूखंडों को शामिल किया गया है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।
रघुनाथपुर रेलवे स्टेशन के पश्चिमी समपार फाटक के विकल्प के रूप में इस ओवरब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। रेलवे फाटक बंद होने पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। इससे स्थानीय लोगों, यात्रियों और आसपास के क्षेत्रों में आने-जाने वाले वाहन चालकों को परेशानी होती है।
परियोजना के लिए कुल 0.3282 हेक्टेयर जमीन यानी लगभग 0.81 एकड़ भूमि की आवश्यकता निर्धारित की गई है। इसमें निजी रैयती जमीन का हिस्सा सबसे अधिक है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, लगभग 0.70747 एकड़ निजी जमीन और 0.10353 एकड़ सरकारी जमीन अधिग्रहण के लिए चिह्नित की गई है।
रघुनाथपुर और ढोढनपुरा में चिह्नित हुई जमीन
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत ब्रह्मपुर अंचल के दो मौजों में जमीन चिह्नित की गई है। रघुनाथपुर मौजा में लगभग 0.69906 एकड़ और ढोढनपुरा मौजा में 0.11194 एकड़ जमीन शामिल है।
रघुनाथपुर मौजा में 64 निजी भूखंडों के साथ 11 सरकारी भूखंड अधिग्रहण के दायरे में हैं। दूसरी ओर, ढोढनपुरा मौजा में दो निजी भूखंड चिह्नित किए गए हैं। इस प्रकार कुल 66 निजी और 11 सरकारी भूखंडों को मिलाकर 77 भूखंडों की जमीन परियोजना के लिए आवश्यक है।
एक भूखंड पर कई सह-रैयतों के नाम
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भूखंडों की संख्या और वास्तविक भू-स्वामियों की संख्या समान नहीं है। कई जमीनों के रिकॉर्ड में एक से अधिक सह-रैयतों के नाम दर्ज हैं। ऐसे में जमीन मालिकों की वास्तविक संख्या भूखंडों की कुल संख्या से अधिक हो सकती है।
सरकारी जमीन के अंतर्गत आम रास्ता, पुरानी परती, हनुमान मंदिर और अनाबाद सर्वसाधारण श्रेणी की भूमि भी शामिल है। इन श्रेणियों की जमीन का कुल रकबा लगभग 0.08006 एकड़ बताया गया है।
ओवरब्रिज बनने से मिलेगी राहत
रघुनाथपुर रेलवे स्टेशन के पास आरओबी का निर्माण पूरा होने से क्षेत्र की यातायात व्यवस्था में सुधार होने की उम्मीद है। अभी रेलवे फाटक बंद होने पर लोगों को ट्रेन के गुजरने तक इंतजार करना पड़ता है। इससे रोजाना आवागमन करने वाले लोगों को समय और ईंधन दोनों की परेशानी होती है।
ओवरब्रिज तैयार होने के बाद रेलवे फाटक पर निर्भरता कम होगी और वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी को परियोजना के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।











