तेल अवीव, इजरायल। इजरायल में चुनाव के बाद राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण नई सरकार का गठन अटक गया है। इस स्थिति में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के विरोधी दलों ने एकजुट होकर सरकार बनाने की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं। विपक्षी खेमे में गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों के बीच बातचीत जारी है।
राजनीतिक हलचल के बीच विपक्षी दलों ने संसद नीसेट के स्पीकर आमिर ओहाना को पद से हटाने के मुद्दे पर भी सहमति बनाई है। आमिर ओहाना नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में स्पीकर पद को लेकर विपक्ष की सक्रियता को मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार बनाने के लिए विपक्ष की रणनीति
चुनाव के बाद बहुमत का आंकड़ा किसी भी गठबंधन के पास नहीं होने से इजरायल में सरकार गठन की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। विपक्षी दल अब अपने मतभेदों को किनारे रखकर साझा रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों के गठबंधन के बीच बातचीत इसी प्रयास का हिस्सा है।
हालांकि, दोनों पक्षों के बीच बातचीत का अंतिम परिणाम अभी सामने नहीं आया है। यदि विपक्षी दलों के बीच सहमति बनती है तो नेतन्याहू के सामने सत्ता बचाने की चुनौती और बढ़ सकती है।
सीधे प्रधानमंत्री चुनाव पर विचार
इजरायल की राजनीति में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा प्रधानमंत्री के सीधे चुनाव का प्रस्ताव है। पिछले करीब दस वर्षों में बार-बार चुनाव के बावजूद स्पष्ट बहुमत वाली सरकार नहीं बनने की समस्या ने इस विकल्प पर चर्चा को बढ़ावा दिया है।
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, विपक्षी खेमे में इस व्यवस्था को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है। सरकार गठन की तस्वीर साफ नहीं होने पर शुक्रवार को संसद के पहले सत्र में इस संबंध में प्रस्ताव पेश किया जा सकता है।
इससे पहले 2021 में भी बेंजामिन नेतन्याहू ने ऐसी स्थिति में प्रधानमंत्री पद के लिए सीधे चुनाव कराने का सुझाव दिया था।
देश के प्रमुख शहरों में प्रदर्शन
इजरायल में जारी राजनीतिक असमंजस के बीच तेल अवीव और हाइफा समेत प्रमुख शहरों में प्रदर्शन हुए हैं। सरकार गठन में लगातार आ रही बाधाओं ने देश की राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
अब सभी की नजर संसद के आगामी सत्र और विपक्षी दलों के बीच होने वाली बातचीत पर है। यदि विपक्ष एक साझा गठबंधन बनाने में सफल रहता है तो इजरायल में सत्ता का समीकरण बदल सकता है। वहीं, सहमति नहीं बनने की स्थिति में राजनीतिक अनिश्चितता आगे भी जारी रह सकती है।











