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दिवाली पर घर की सजावट और पार्टी को लेकर न लें तनाव, मनोवैज्ञानिक ने बताया कैसे बिना परफेक्शन के मनाएं त्योहार

वडोदरा, गुजरात। दिवाली को खुशियों, रोशनी और परिवार के साथ जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, रंगोली बनाते हैं, नए कपड़े खरीदते हैं और परिवार के साथ पूजा एवं उत्सव की तैयारियां करते हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में त्योहार मनाने के तरीके में आए बदलाव के कारण कई लोगों के लिए ये तैयारियां मानसिक दबाव का कारण बन गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हर चीज को परफेक्ट बनाने की कोशिश में लोग त्योहार की असली खुशी खो देते हैं।

वडोदरा के भैलाल अमीन जनरल अस्पताल की क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक आश्का मिस्त्री के अनुसार, आजकल दिवाली की तैयारियां कई सप्ताह पहले ही शुरू हो जाती हैं। घर की सजावट, थीम आधारित पार्टियां, विशेष पकवान और मेहमानों के स्वागत की योजनाएं लोगों की जिम्मेदारियां बढ़ा देती हैं। कई बार इन तैयारियों के कारण त्योहार आनंद का अवसर होने के बजाय काम की लंबी सूची बन जाता है।

परिवार की अपेक्षाएं भी बढ़ा सकती हैं दबाव

आश्का मिस्त्री के अनुसार, परिवारों में पुरानी परंपराओं को बनाए रखने और आधुनिक तरीके से त्योहार मनाने के बीच संतुलन बनाना हमेशा आसान नहीं होता। खासकर युवा पीढ़ी को परिवार की अपेक्षाओं और अपनी पसंद के बीच तालमेल बैठाना पड़ता है। इस वजह से कई बार तनाव और असमंजस की स्थिति पैदा हो जाती है।

सोशल मीडिया पर दिखावे से बढ़ रही परेशानी

सोशल मीडिया पर दूसरों के त्योहार की तस्वीरें और वीडियो देखकर लोग अपने जश्न की तुलना करने लगते हैं। किसी का सजा हुआ घर, महंगे कपड़े या शानदार पार्टी देखकर लोग भी वैसा ही आयोजन करने का दबाव महसूस कर सकते हैं।

मनोवैज्ञानिक का मानना है कि इस तरह की तुलना त्योहार के वास्तविक उद्देश्य से लोगों को दूर कर देती है। दिवाली में सबसे सुंदर सजावट या सबसे बड़ी पार्टी करने की कोई प्रतियोगिता नहीं होती। इसका उद्देश्य अपनों के साथ समय बिताना और खुशियां साझा करना है।

कुछ लोगों के लिए भावनात्मक रूप से कठिन होता है त्योहार

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि दिवाली हर व्यक्ति के लिए समान रूप से खुशी का अवसर नहीं होती। आर्थिक समस्याएं, पारिवारिक विवाद, अकेलापन और किसी प्रियजन की कमी इस दौरान अधिक महसूस हो सकती है। इसलिए परिवार और समाज को ऐसे लोगों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन पर जबरन खुश रहने या उत्सव में शामिल होने का दबाव नहीं डालना चाहिए।

बिना तनाव के दिवाली मनाने के लिए अपनाएं ये तरीके

आश्का मिस्त्री के अनुसार, त्योहार को आनंददायक बनाने के लिए लोगों को अपनी अपेक्षाएं वास्तविक रखनी चाहिए। घर की सजावट और तैयारियों में जरूरत से ज्यादा समय लगाने के बजाय परिवार के सदस्यों के साथ जिम्मेदारियां बांटनी चाहिए।

इसके अलावा, आराम के लिए समय निकालना, अनावश्यक खर्च से बचना और सोशल मीडिया पर दूसरों से तुलना नहीं करना भी जरूरी है।

विशेषज्ञों का संदेश साफ है कि दिवाली की खुशी दिखावे और परफेक्शन में नहीं, बल्कि परिवार के साथ बिताए गए समय, आपसी प्रेम और मानसिक सुकून में छिपी है। इसलिए इस बार त्योहार को अपनी क्षमता और पसंद के अनुसार मनाएं।

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