Home » लाइफस्टाइल » Diwali 2026: साधगुरु ने बताया दीपक जलाना ही काफी नहीं, मन का अंधकार मिटाने के लिए अपनाएं ये बातें

Diwali 2026: साधगुरु ने बताया दीपक जलाना ही काफी नहीं, मन का अंधकार मिटाने के लिए अपनाएं ये बातें

कोयंबटूर, तमिलनाडु। दीपावली का त्योहार आते ही घरों में दीपक जलाने, सजावट करने और खुशियां बांटने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लेकिन क्या केवल दीपक जलाने से जीवन का हर अंधकार दूर हो सकता है? ईशा फाउंडेशन के संस्थापक साधगुरु ने दीपावली 2026 के अवसर पर इसी विषय पर अपना विचार साझा किया है। उन्होंने कहा कि बाहरी रोशनी के साथ मन के भीतर मौजूद अंधकार को दूर करना भी जरूरी है।

3 नवंबर 2026 को ईशा फाउंडेशन की ओर से जारी लेख में साधगुरु ने दीपावली के आध्यात्मिक महत्व को समझाया। उनके अनुसार, दीपावली केवल दीपों और उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि जीवन में स्पष्टता, जागरूकता और नई शुरुआत का प्रतीक है।

दीपावली का वास्तविक अर्थ समझना जरूरी

साधगुरु के मुताबिक, दीपक की रोशनी घर के अंधेरे को दूर करती है, लेकिन मनुष्य के भीतर मौजूद नकारात्मक विचारों और भावनाओं को दूर करने के लिए स्वयं को समझना आवश्यक है। इसके लिए व्यक्ति को अपनी सोच, व्यवहार और फैसलों का आत्मविश्लेषण करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि त्योहार का अवसर हमें अपने भीतर झांकने और जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है। इसलिए केवल घर की सफाई और सजावट के बजाय अपने विचारों में भी सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए।

क्रोध, घृणा और भय से पैदा होता है मानसिक अंधकार

साधगुरु ने क्रोध, ईर्ष्या, घृणा और भय जैसी भावनाओं को मनुष्य के भीतर अशांति का कारण बताया। उन्होंने इन भावनाओं को नरकासुर की पौराणिक कथा से जोड़ते हुए नकारात्मकता पर विजय पाने का संदेश दिया।

उनके अनुसार, कठिन भावनाओं को नजरअंदाज करने के बजाय उन्हें समझना और उन पर जागरूकता के साथ प्रतिक्रिया देना जरूरी है। आत्म-अवलोकन व्यक्ति को अपने व्यवहार में सुधार करने में मदद कर सकता है।

जीवन में स्पष्टता और सक्रियता भी जरूरी

साधगुरु ने बताया कि केवल ज्ञान, आत्मविश्वास और महत्वाकांक्षा होना पर्याप्त नहीं है। सही निर्णय लेने के लिए स्पष्ट सोच और समझ भी जरूरी है। जीवन में उत्साह बनाए रखना, जिम्मेदारियों को समझना और परिवार के साथ अर्थपूर्ण समय बिताना भी महत्वपूर्ण है।

उनका संदेश है कि इस दीपावली बाहरी रोशनी के साथ अपने भीतर भी जागरूकता का दीप जलाएं। यही त्योहार को वास्तविक अर्थों में सार्थक बनाने का तरीका है।

संबंधित समाचार
E-Paper image 2