वाशिंगटन, अमेरिका। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को मिली हार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति पर सवाल उठने लगे हैं। करीब आठ महीने से जारी ईरान युद्ध के बीच अब ट्रंप प्रशासन के सामने सैन्य कार्रवाई जारी रखने और इसके आर्थिक परिणामों को संभालने की चुनौती है। चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत के पीछे ईरान के साथ संघर्ष और बढ़ती महंगाई को महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।
ट्रंप ने बुधवार को स्वीकार किया कि युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी ने रिपब्लिकन पार्टी के चुनावी प्रदर्शन को प्रभावित किया। हालांकि, उन्होंने सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि यदि दोबारा ऐसी स्थिति आती है तो वह फिर यही फैसला लेंगे।
ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विकल्प
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के पास ईरान के खिलाफ कई विकल्प मौजूद हैं। इनमें मौजूदा सैन्य अभियान जारी रखना, ईरान के तेल निर्यात पर नौसैनिक नाकेबंदी बनाए रखना और उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े पिकैक्स माउंटेन ठिकाने पर हमला करना शामिल है।
इसके अलावा ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का विकल्प भी मौजूद है। हालांकि, किसी बड़े सैन्य अभियान के गंभीर अंतरराष्ट्रीय परिणाम हो सकते हैं।
ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है असर
ईरान के खिलाफ बड़े हमलों से वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है। तेल की आपूर्ति प्रभावित होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका असर अमेरिका सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के खर्च पर पड़ सकता है।
अमेरिका में पहले से ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर मतदाताओं में चिंता बनी हुई है। ऐसे में ट्रंप के लिए सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा।
सर्वेक्षण में सामने आई मतदाताओं की नाराजगी
एसोसिएटेड प्रेस के मतदाता सर्वेक्षण के अनुसार, करीब 60 प्रतिशत मतदाताओं ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को गलत निर्णय माना। लगभग इतनी ही संख्या में लोगों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की।
चुनावी हार के बाद ट्रंप प्रशासन के सामने अब ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर संतुलित फैसला लेने की चुनौती है। सैन्य कार्रवाई और ऊर्जा कीमतों के बीच संतुलन बनाना उनकी आगे की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण होगा।












