भारतीय जनता पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में मिली जीत के बाद पार्टी का आत्मविश्वास बढ़ा है और अब पूरा ध्यान यूपी पर केंद्रित किया जा रहा है।
पार्टी ने ‘मिशन 2027’ के तहत बूथ प्रबंधन को सबसे मजबूत हथियार बनाने की योजना बनाई है। इसी क्रम में लगभग 2000 अनुभवी कार्यकर्ताओं को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में भेजा गया है। इन कार्यकर्ताओं को 15 दिनों के भीतर बूथ समितियों का सत्यापन, सामाजिक समीकरणों का आकलन और चुनावी स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें प्रत्येक मंडल में करीब 10 दिन रहकर जमीनी हकीकत समझनी होगी।
इस दिशा में लखनऊ, गाजियाबाद और कानपुर में बैठकों के जरिए रणनीति को अंतिम रूप दिया जा चुका है। 12 मई को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी जिलाध्यक्षों के साथ बैठक कर बूथ मैनेजमेंट को और मजबूत करने पर चर्चा करेंगे।
प्रदेश के 98 संगठनात्मक जिलों के 1981 मंडलों में बूथ समितियों और शक्ति केंद्रों की जांच के लिए इन कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें बूथ अध्यक्ष, प्रभारियों और कार्यकर्ताओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना होगा। साथ ही विपक्षी दलों की स्थिति, मतदाता सूची, जातीय समीकरण और संभावित जीत-हार के कारणों पर भी विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी।
पार्टी को पहले के चुनावों में बूथ प्रबंधन से काफी फायदा मिला है। अमित शाह के नेतृत्व में 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में माइक्रोमैनेजमेंट की रणनीति ने बड़ी सफलता दिलाई थी। हालांकि बाद के चुनावों में कई जगह बूथ कमेटियों का भौतिक सत्यापन न होने के कारण खामियां सामने आई थीं, जिन्हें अब दूर करने की कोशिश की जा रही है।
आने वाले समय में संगठनात्मक बदलाव और सरकार में संभावित विस्तार के साथ पार्टी अपनी चुनावी तैयारियों को और तेज करने की योजना बना रही है। बूथ स्तर पर मजबूती लाने के साथ ही कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर चुनावी समीकरणों को अपने पक्ष में करने की कवायद तेज हो गई है।











