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AI से वैश्विक श्रम उत्पादकता में 3.8% तक बढ़ोतरी संभव, IMF की रिपोर्ट में बड़ा दावा

वाशिंगटन, अमेरिका

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के एक नए अध्ययन के अनुसार, लंबी अवधि में AI वैश्विक श्रम उत्पादकता को 3.8 प्रतिशत तक बढ़ाने में मदद कर सकता है। रिपोर्ट में विकसित अर्थव्यवस्थाओं के AI पेटेंट और रोजगार से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।

अध्ययन के मुताबिक, AI का आर्थिक प्रभाव केवल भविष्य की संभावना नहीं है, बल्कि इसका असर पहले से दिखाई देने लगा है। वर्ष 2000 से 2017 के बीच AI से जुड़े पेटेंट की गतिविधियों के साथ प्रति कर्मचारी उत्पादन में करीब 0.8 से 1.2 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई।

इस अवधि में AI तकनीक से संबंधित पेटेंट गतिविधियों में तेजी आई। रिपोर्ट के अनुसार, 2017 तक AI से जुड़े पेटेंट की संख्या 2000 के मुकाबले तीन गुना से अधिक हो गई थी।

IMF के अध्ययन से संकेत मिलता है कि AI का इस्तेमाल कंपनियों की उत्पादन क्षमता और कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद कर सकता है। मशीनों और AI आधारित प्रणालियों के जरिए कई प्रक्रियाओं को अधिक तेज और प्रभावी बनाया जा सकता है।

हालांकि, AI से मिलने वाले लाभ सभी देशों और क्षेत्रों में समान नहीं होंगे। जिन अर्थव्यवस्थाओं में डिजिटल बुनियादी ढांचा, कुशल श्रमबल और नई तकनीक अपनाने की क्षमता अधिक है, उन्हें इसका लाभ तेजी से मिल सकता है।

भारत जैसे देशों के लिए इस बदलाव के साथ कौशल विकास और प्रशिक्षण पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा। कर्मचारियों को AI आधारित तकनीकों के अनुरूप तैयार करने से उत्पादकता बढ़ाने और रोजगार के बदलते स्वरूप के साथ तालमेल बैठाने में मदद मिल सकती है।

IMF का अध्ययन संकेत देता है कि AI आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक विकास और श्रम बाजार को प्रभावित करने वाली प्रमुख तकनीकों में शामिल हो सकता है।

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