ढाका, संवाददाता।
भारत में मुसलमानों के कथित उत्पीड़न को लेकर उठे विवाद के बीच बांग्लादेश सरकार ने बड़ा बयान दिया है। सरकार ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि उसे ऐसी किसी भी घटना के ठोस प्रमाण या आधिकारिक रिपोर्ट नहीं मिले हैं। साथ ही, सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कई खबरों को पुराना और भ्रामक बताया गया है।
बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगियों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भारत के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर पश्चिम बंगाल और असम में मुसलमानों के उत्पीड़न के दावों का कोई पुष्ट आधार नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या आपके पास ऐसा कोई ठोस डेटा या प्रमाण है, जिससे यह साबित हो कि वहां मुसलमानों के खिलाफ अत्याचार हो रहा है?”
गृह मंत्री ने आगे कहा कि बांग्लादेश के राजनयिक मिशन और विदेश मंत्रालय लगातार भारत की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। “हमारे दूतावास और अधिकारी वहां मौजूद हैं। अगर ऐसी कोई गंभीर स्थिति होती, तो हमें जरूर जानकारी मिलती। अभी तक हमें किसी प्रकार की पुष्टि नहीं मिली है,” उन्होंने स्पष्ट किया।
दरअसल, यह विवाद तब बढ़ा जब जमात-ए-इस्लामी ने हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद भारत में मुसलमानों के खिलाफ कथित उत्पीड़न का आरोप लगाया और बांग्लादेश सरकार से भारतीय उच्चायुक्त को तलब करने की मांग की। पार्टी का दावा था कि सीमा पार सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा है और इसके प्रभाव बांग्लादेश तक पड़ सकते हैं।
हालांकि, बांग्लादेश सरकार ने इन आरोपों को गंभीरता से लेने से इनकार करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर पुरानी और संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत की गई घटनाओं को फैलाया जा रहा है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि के ऐसी खबरों पर भरोसा न करें।
इस बीच, भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी के मुद्दे पर भी सरकार ने अपनी स्थिति साफ की है। बांग्लादेश के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें भारत की ओर से सीमा पर नई फेंसिंग को लेकर कोई औपचारिक जानकारी नहीं दी गई है। इस पर टिप्पणी करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि यदि भारत अपनी सीमा के भीतर कोई कदम उठाता है, तो इस विषय पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की जाएगी।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी सीमा संबंधी निर्णय को अंतरराष्ट्रीय मानकों और द्विपक्षीय समझौतों के तहत ही आगे बढ़ाया जाएगा। बांग्लादेश ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में पारदर्शिता और संवाद की नीति अपनाएगा।
कुल मिलाकर, बांग्लादेश सरकार का यह रुख क्षेत्रीय स्तर पर बढ़ते दुष्प्रचार और राजनीतिक बयानबाजी के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।












