मेरठ, उत्तर प्रदेश
मेरठ। मेरठ के परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र में फर्जी एंटी करप्शन अधिकारी बनकर युवक को अगवा करने और 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बोलेरो नियो में सवार लोगों ने युवक को जबरन गाड़ी में बैठाया और उसे छोड़ने के बदले रकम की मांग की। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच की और पांच आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, कुंडा निवासी 22 वर्षीय छिंदा सिंह मंगलवार शाम करीब सात बजे झब्बापुरी गांव गया था। इसी दौरान बोलेरो सवार तीन लोग वहां पहुंचे। उन्होंने खुद को एंटी करप्शन अधिकारी बताया और युवक को कई आरोप लगाते हुए जबरन गाड़ी में बैठा लिया।
वॉकी-टॉकी दिखाकर जमाया रौब
आरोपितों के पास वॉकी-टॉकी था। वे खुद को सरकारी अधिकारी बताकर कार्रवाई की धमकी दे रहे थे। इस वजह से मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने विरोध नहीं किया। युवक को अपने साथ ले जाने के बाद आरोपितों ने उसे छोड़ने के लिए 50 लाख रुपये मांगे।
छिंदा सिंह ने इतनी बड़ी रकम होने से इनकार किया तो आरोपितों ने उसके चाचा को फोन कराकर रुपये मंगाने के लिए कहा। जब रकम का इंतजाम नहीं हो सका, तो आरोपित युवक को रात करीब 11 बजे झारखंडी मंदिर के पास छोड़कर भाग गए।
आधी रात को पुलिस को दी सूचना
युवक ने रात करीब दो बजे परीक्षितगढ़ थाना प्रभारी केदार सिंह को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की और सर्विलांस टीम की मदद से आरोपितों की पहचान करने की कोशिश की।
जांच के बाद पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपितों में मोनू और मुरसलीन निवासी झब्बापुरी, आशीष निवासी गेसूपुर किठौर तथा इकबाल और फिरोज निवासी बक्सर भावनपुर शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपित किसी सरकारी एंटी करप्शन विभाग के अधिकारी नहीं थे। वे एंटी करप्शन सोशल वेलफेयर नाम की संस्था चलाते थे और कथित तौर पर इसी पहचान का इस्तेमाल कर लोगों पर दबाव बनाते थे।
ऑनलाइन गेम खेलने की जानकारी से आया निशाने पर
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि उन्हें छिंदा सिंह के ऑनलाइन गेम खेलने की जानकारी थी। उन्हें अंदाजा था कि युवक के पास काफी पैसा हो सकता है। इसी अनुमान के आधार पर मोनू और मुरसलीन ने उसकी रेकी की थी।
पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से एक बोलेरो गाड़ी, पांच मोबाइल फोन, एक वॉकी-टॉकी और दो पहचान पत्र बरामद किए हैं। बरामद सामान को मामले की जांच से जोड़ा गया है।
न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेजे गए आरोपी
पुलिस ने पांचों आरोपितों को गिरफ्तार करने के बाद न्यायालय में पेश किया। वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इस मामले में फर्जी अधिकारी बनकर युवक को ले जाने और रंगदारी मांगने के आरोपों की जांच के बाद पुलिस ने कार्रवाई की है।
घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि किसी व्यक्ति के सरकारी अधिकारी होने के दावे पर भरोसा करने से पहले उसकी पहचान की पुष्टि करना जरूरी है। किसी भी संदिग्ध स्थिति में पुलिस को सूचना देना उचित कदम हो सकता है।











