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हिंद महासागर में भारत की नीति दादागिरी नहीं, शांति और सुरक्षा की है: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुनिया को दिया स्पष्ट संदेश

नई दिल्ली, दिल्ली

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को लेकर स्पष्ट और सशक्त संदेश देते हुए कहा कि भारत की समुद्री नीति किसी भी देश पर प्रभुत्व स्थापित करने या दादागिरी दिखाने की नहीं, बल्कि शांति, स्थिरता, सुरक्षित समुद्री मार्ग और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की है। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना केवल देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा ही नहीं कर रही, बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

रक्षा मंत्री ने यह बात स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’ की भारतीय नौसेना में कमीशनिंग से एक दिन पहले नौसेना के अधिकारियों और जवानों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने नौसेना के साहस, अनुशासन और पेशेवर क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारतीय नौसेना देश के रणनीतिक हितों की सबसे मजबूत सुरक्षा कवच बनकर उभरी है। उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बावजूद नौसेना पूरी तत्परता के साथ राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रही है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि हिंद महासागर भारत के लिए केवल भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक प्रगति, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक हितों का भी प्रमुख आधार है। उन्होंने बताया कि भारत का 90 प्रतिशत से अधिक विदेशी व्यापार समुद्री मार्गों के माध्यम से होता है, जबकि कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस सहित ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा भी समुद्री रास्तों से ही देश तक पहुंचता है। इसके अलावा भारत का विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone-EEZ), लंबी समुद्री तटरेखा और अंडमान-निकोबार तथा लक्षद्वीप जैसे द्वीपीय क्षेत्र समुद्री सुरक्षा के महत्व को और बढ़ा देते हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय नौसेना की भूमिका केवल समुद्री सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है। नौसेना अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, समुद्री डकैती विरोधी अभियानों, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियानों, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत कार्यों और संकटग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी जैसे अनेक महत्वपूर्ण कार्यों में भी अग्रणी भूमिका निभाती रही है। इन अभियानों ने वैश्विक स्तर पर भारत की एक जिम्मेदार, विश्वसनीय और भरोसेमंद समुद्री शक्ति की पहचान को और मजबूत किया है।

उन्होंने कहा कि भारत की समुद्री रणनीति “सागर” (Security and Growth for All in the Region) की अवधारणा पर आधारित है। इस नीति का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र के सभी देशों के साथ सहयोग बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी देश के खिलाफ आक्रामक रवैया नहीं अपनाता, बल्कि सभी देशों के साथ विश्वास, साझेदारी और साझा विकास के सिद्धांत पर आगे बढ़ता है।

राजनाथ सिंह ने स्वदेशी युद्धपोत ‘महेंद्रगिरि’ को भारतीय रक्षा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह युद्धपोत आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजबूत उदाहरण है। आधुनिक स्टेल्थ तकनीक, अत्याधुनिक मिसाइल प्रणाली, उन्नत रडार, आधुनिक सेंसर और बहुआयामी युद्ध क्षमता से लैस यह फ्रिगेट भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता को और अधिक सशक्त बनाएगा। इसके नौसेना में शामिल होने से समुद्री निगरानी, दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और समुद्री सुरक्षा अभियानों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए व्यापक प्रयास किए हैं। स्वदेशी युद्धपोतों, मिसाइल प्रणालियों और आधुनिक रक्षा उपकरणों का निर्माण इसी दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। इससे न केवल देश की रक्षा क्षमता मजबूत हो रही है, बल्कि रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में तकनीकी विकास और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर आज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सामरिक और आर्थिक क्षेत्रों में शामिल है। वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है और ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी यह समुद्री मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत का शांति, सहयोग और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था पर जोर क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सकारात्मक संदेश माना जा रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय नौसेना का लगातार आधुनिकीकरण, स्वदेशी युद्धपोतों का बेड़े में शामिल होना और समुद्री सुरक्षा के प्रति भारत की सक्रिय नीति आने वाले वर्षों में देश की सामरिक स्थिति को और मजबूत करेगी। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका एक जिम्मेदार और विश्वसनीय समुद्री शक्ति के रूप में और अधिक सुदृढ़ होगी।

रक्षा विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में समुद्री सुरक्षा केवल सैन्य शक्ति का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति, आपदा प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है। ऐसे समय में भारत द्वारा शांति, सहयोग और साझा सुरक्षा की नीति पर दिया गया जोर यह संकेत देता है कि देश अपनी बढ़ती समुद्री क्षमता का उपयोग किसी पर दबाव बनाने के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षित समुद्री मार्ग और साझा समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए करना चाहता है। यही संदेश रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन के माध्यम से दुनिया के सामने स्पष्ट रूप से रखा।

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