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नशा मुक्त भारत अभियान की 6वीं वर्षगांठ पर 12 करोड़ लोगों को शपथ दिला सकते हैं पीएम मोदी, देशभर में चलेगा ऐतिहासिक जनजागरूकता अभियान

नई दिल्ली, दिल्ली

नशे के खिलाफ देशव्यापी जनआंदोलन को नई मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार 18 अगस्त को एक बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम की तैयारी में जुटी है। नशा मुक्त भारत अभियान की छठी वर्षगांठ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देशभर के 12 करोड़ से अधिक नागरिकों को ड्रग्स और नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ सामूहिक शपथ दिला सकते हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय करेगा। सरकार का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को इस अभियान से जोड़कर नशे के खिलाफ व्यापक जनजागरूकता पैदा करना और युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करना है।

मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है। संयुक्त सचिव (ड्रग रोकथाम) संदीप रेवाजी राठौड़ ने विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संबद्ध संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में कार्यक्रम की कार्यान्वयन रणनीति, जनभागीदारी बढ़ाने और देशभर में एक साथ शपथ समारोह आयोजित करने की विस्तृत योजना पर चर्चा की गई।

सरकार की योजना के अनुसार, शपथ कार्यक्रम ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आयोजित किया जाएगा ताकि देश के दूर-दराज क्षेत्रों तक भी अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। सभी केंद्रीय मंत्रालयों, संबद्ध कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs), स्वायत्त निकायों, शैक्षणिक संस्थानों और फील्ड कार्यालयों में सामूहिक शपथ समारोह आयोजित किए जाएंगे। राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन को भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए कहा गया है।

बैठक में यह भी तय किया गया कि अधिकारियों, कर्मचारियों, छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों, स्वयंसेवकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। रेलवे, रक्षा मंत्रालय, पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs), आयुष, ग्रामीण विकास, राजस्व विभाग सहित कई मंत्रालयों और संस्थानों को भी अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त स्वयंसेवी संस्थाएं, आध्यात्मिक संगठन, युवा संगठन, खेल संस्थाएं और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स भी जनजागरूकता फैलाने में सहयोग करेंगे।

मंत्रालय का कहना है कि इस सामूहिक शपथ का उद्देश्य केवल एक औपचारिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं है, बल्कि लोगों में नशे के खिलाफ सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। इसके माध्यम से नागरिकों को यह संदेश दिया जाएगा कि नशीले पदार्थों से दूर रहना केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के हित से भी जुड़ा विषय है। विशेष रूप से युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर उसके प्रभाव तथा सामाजिक परिणामों के प्रति जागरूक करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

नशा मुक्त भारत अभियान की शुरुआत वर्ष 2020 में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा की गई थी। प्रारंभ में इसे देश के 272 संवेदनशील जिलों में लागू किया गया था, लेकिन बाद में इसका विस्तार पूरे देश में किया गया। अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, पंचायतों, स्वयंसेवी संस्थाओं और विभिन्न सरकारी विभागों के सहयोग से लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार, इस अभियान से अब तक करोड़ों नागरिकों तक नशे के दुष्प्रभावों और उससे बचाव का संदेश पहुंचाया जा चुका है।

सरकार का मानना है कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था या स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास से जुड़ी बड़ी चुनौती है। इसलिए जनभागीदारी, जागरूकता और सामुदायिक सहयोग के माध्यम से ही इस समस्या का प्रभावी समाधान संभव है। इसी सोच के साथ इस बार 12 करोड़ से अधिक लोगों को एक साथ शपथ दिलाने का लक्ष्य रखा गया है।

यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो यह नशे के खिलाफ दुनिया के सबसे बड़े सामूहिक शपथ अभियानों में से एक होगा। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से युवाओं में सकारात्मक सोच विकसित होगी, समाज में नशे के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और “नशा मुक्त भारत” के राष्ट्रीय संकल्प को नई गति मिलेगी। आने वाले समय में भी केंद्र सरकार विभिन्न मंत्रालयों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से ऐसे जागरूकता कार्यक्रम जारी रखने की योजना पर काम कर रही है, ताकि देश को नशे की समस्या से मुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में व्यापक जनसहभागिता सुनिश्चित की जा सके।

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