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CBSE स्कूलों में डमी दाखिलों पर सूचना आयोग सख्त, औचक निरीक्षण की सिफारिश

नई दिल्ली, भारत

नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध स्कूलों में डमी दाखिलों के मामलों पर चिंता जताई है। आयोग ने बोर्ड को स्कूलों में औचक निरीक्षण कराने और अनिवार्य उपस्थिति से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने की सिफारिश की है। इस कदम का उद्देश्य स्कूलों में विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति और दाखिला संबंधी नियमों के पालन की स्थिति की जांच करना है।

डमी दाखिला ऐसी व्यवस्था को कहा जाता है, जिसमें विद्यार्थी का नाम स्कूल के रिकॉर्ड में दर्ज रहता है, लेकिन वह नियमित रूप से कक्षाओं में शामिल नहीं होता। ऐसे विद्यार्थी आमतौर पर परीक्षा देने के लिए ही स्कूल पहुंचते हैं। इस तरह की व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं, क्योंकि इससे नियमित पढ़ाई और स्कूलों में उपस्थिति से संबंधित नियम प्रभावित हो सकते हैं।

शिकायत के बाद आयोग ने लिया संज्ञान

यह मामला एक शिकायत के बाद सामने आया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि भोपाल के कुछ निजी मिशनरी स्कूलों में कक्षाओं में उपस्थित नहीं होने वाले विद्यार्थियों को भी डमी प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता ने स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति, विषय चयन और निर्धारित पाठ्यपुस्तकों से संबंधित नियमों की जानकारी मांगी थी। आरोपों के अनुसार, कुछ विद्यार्थी नियमित कक्षाओं में शामिल हुए बिना ही स्कूल से संबंधित प्रमाणपत्र प्राप्त कर रहे थे।

मामले की सुनवाई के दौरान सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलंगी ने सीबीएसई को अपने संबद्ध स्कूलों में औचक निरीक्षण करने का सुझाव दिया। आयोग ने यह सिफारिश सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 25(5) के तहत की। इसका उद्देश्य संबंधित नियमों के पालन की जांच और संभावित अनियमितताओं पर ध्यान देना है।

आरटीआई आवेदन पर भी उठे सवाल

शुरुआत में सीबीएसई के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी ने आवेदन शुल्क के लिए जमा किए गए इंडियन पोस्टल ऑर्डर में त्रुटि का हवाला देते हुए आवेदन वापस कर दिया था। सुनवाई के दौरान आयोग ने स्पष्ट किया कि तकनीकी आधार पर सूचना रोकना आरटीआई कानून की भावना के अनुरूप नहीं है।

इसके बाद केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी ने माफी मांगी और मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने पर सहमति जताई। बाद में सीबीएसई ने आवेदन में उठाए गए प्रत्येक बिंदु पर अपना जवाब प्रस्तुत किया, जिसे आयोग ने रिकॉर्ड में लिया।

स्कूलों में उपस्थिति नियमों के पालन पर जोर

आयोग की सिफारिश से संबद्ध स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति की निगरानी का मुद्दा फिर चर्चा में आया है। औचक निरीक्षण के माध्यम से स्कूलों के रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति की जांच करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, आयोग की सिफारिश को सभी स्कूलों में डमी दाखिले साबित होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाना है।

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