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अरामको मुख्यालय पर हूतियों का बड़ा हमला, ऊपरी मंजिलों में लगी आग; रूस-चीन ने शुरू की युद्धविराम की पहल

दाहरान, सऊदी अरब। सऊदी अरब की प्रमुख तेल कंपनी अरामको के दाहरान स्थित मुख्यालय पर हूती विद्रोहियों के बैलिस्टिक मिसाइल हमले के बाद भारी नुकसान की खबर सामने आई है। देर रात हुए हमले में मुख्यालय की इमारत की ऊपरी तीन मंजिलें बुरी तरह प्रभावित हुईं। इसके बाद भवन में आग लग गई और धुएं का गुबार उठने लगा। प्रभावित मंजिलों पर कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय स्थित थे।

हमले के बाद आग ऊपरी हिस्से से नीचे की मंजिलों तक फैलने की खबर मिली है। इस घटना में तीन लोगों की मौत होने की चर्चा है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हमले की गंभीरता को देखते हुए अरामको के मुख्यालय को हुए नुकसान पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

सऊदी अरब के कई शहरों पर हमले

हूतियों के हमले केवल अरामको के मुख्यालय तक सीमित नहीं रहे। सऊदी अरब की राजधानी रियाद और अन्य प्रमुख स्थानों को भी निशाना बनाए जाने की खबर है। जानकारी के अनुसार, रियाद पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए गए। वहीं, अल-खर्ज पर क्रूज मिसाइल से हमला किए जाने की सूचना है।

लगातार हमलों के बीच सऊदी अरब में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। अरामको जैसी बड़ी तेल कंपनी के मुख्यालय पर हमला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का संबंध व्यापक आर्थिक गतिविधियों से भी है। हालांकि, फिलहाल तेल उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति पर हमले के प्रभाव के बारे में ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है।

ट्रंप के बयान से बढ़ी चिंता

संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि युद्ध में अमेरिका के शामिल होने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। इस बयान के बाद संघर्ष के और बढ़ने की आशंका को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। अमेरिका की संभावित भूमिका को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

युद्धविराम के लिए रूस और चीन सक्रिय

दूसरी ओर, संघर्ष को रोकने के लिए कूटनीतिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि रूस और चीन ने युद्धविराम को लेकर उनसे संपर्क किया है। ओमान भी युद्धविराम की कोशिशों में शामिल बताया गया है।

मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच बातचीत की पहल को क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन संपर्कों के बाद कोई औपचारिक समझौता हो पाया है या नहीं।

अरामको के मुख्यालय पर हमले, रियाद और अल-खर्ज को निशाना बनाए जाने तथा अमेरिका की संभावित भागीदारी से संघर्ष की गंभीरता बढ़ गई है। ऐसे में रूस, चीन और ओमान की मध्यस्थता संबंधी कोशिशें महत्वपूर्ण हो गई हैं। आने वाले दिनों में युद्धविराम को लेकर होने वाली प्रगति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।

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