नई दिल्ली, दिल्ली
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में यमुना नदी के किनारे स्थित वाजपेयी के स्मारक ‘सदैव अटल' पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह समेत कई प्रमुख नेता भी मौजूद रहे।
नेताओं ने वाजपेयी के सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया। देश की राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी का नाम ऐसे नेता के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने लंबे समय तक संसदीय लोकतंत्र और राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया।
अमित शाह ने प्रतिमा का किया अनावरण
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री के जीवन और देशसेवा में उनके योगदान को याद किया।
शाह ने कहा कि अटल जी ने अपने जीवन का एक-एक क्षण देशसेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने वाजपेयी के राजनीतिक जीवन, विचारों और राष्ट्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का उल्लेख किया।
भाजपा के पहले प्रधानमंत्री
अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के पहले ऐसे नेता थे, जिन्होंने प्रधानमंत्री पद संभाला। वह तीन बार प्रधानमंत्री रहे। उनका पहला कार्यकाल बहुत छोटा रहा, जबकि बाद में उन्होंने पूर्ण कार्यकाल के साथ सरकार का नेतृत्व किया।
प्रधानमंत्री के रूप में वाजपेयी के कार्यकाल को कई महत्वपूर्ण फैसलों और योजनाओं के लिए याद किया जाता है। उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास और देश की संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए।
उनके कार्यकाल में भारत की रणनीतिक और विदेश नीति को लेकर भी महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं। पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने के लिए उनकी सरकार ने बातचीत और संपर्क की पहल भी की।
राजनीति से अलग भी थी पहचान
वाजपेयी की पहचान केवल एक राजनेता तक सीमित नहीं थी। वे प्रभावशाली वक्ता और कवि भी थे। उनकी कविताओं और भाषणों में राष्ट्र, समाज और मानवीय भावनाओं से जुड़े विषय दिखाई देते थे।
संसद में उनके भाषणों को राजनीतिक इतिहास में विशेष स्थान मिला। वे अपने राजनीतिक विरोधियों के साथ भी संवाद और व्यक्तिगत संबंध बनाए रखने के लिए जाने जाते थे।
जीवन और राजनीतिक सफर
अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहते हुए पत्रकारिता और राजनीति दोनों क्षेत्रों में काम किया। बाद में वे राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए।
वाजपेयी लंबे समय तक संसद के सदस्य रहे और विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई। भारतीय जनता पार्टी के गठन के बाद पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
16 अगस्त 2018 को नई दिल्ली में उनका निधन हुआ। उनके निधन के बाद से हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।
इस बार भी राष्ट्रीय राजधानी में ‘सदैव अटल' पर कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें नमन किया। देश के अलग-अलग हिस्सों में भी कार्यक्रम आयोजित कर उनके योगदान को याद किया गया।
अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि उनके लंबे राजनीतिक जीवन, राष्ट्रसेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों में उनके योगदान को याद करने का अवसर बनी।












