नई दिल्ली, भारत। फ्रांस में महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया। शनिवार को हुई आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट के बाद रविवार को देश के कई शहरों में तनावपूर्ण शांति देखने को मिली। राजधानी पेरिस समेत कई प्रमुख शहरों में सड़कों पर मलबा और क्षतिग्रस्त संपत्तियां प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की तस्वीर पेश कर रही थीं।
आर्थिक असमानता के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग
फ्रांस में बढ़ती महंगाई, आर्थिक असमानता और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी है। इन्हीं मुद्दों के विरोध में शनिवार को बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। अनुमान के मुताबिक, देशभर में पांच लाख से अधिक लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया।
हालांकि, कई जगह प्रदर्शन हिंसक हो गए। दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। सार्वजनिक संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया, जिससे कई शहरों में सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं।
ऐतिहासिक इमारत से उठता रहा धुआं
हिंसा का असर ऐतिहासिक धरोहरों पर भी दिखाई दिया। लिमोज शहर में 143 साल पुरानी सिटी हॉल की इमारत से रविवार को भी धुआं उठता देखा गया। इसके अलावा पेरिस, मार्सेय, ल्योन, बोर्डो, रीम्स, स्ट्रासबर्ग, ग्रेनोबल और नीस सहित कई शहरों में आगजनी तथा तोड़फोड़ के निशान मिले।
घटनाओं के बाद प्रभावित इलाकों में सफाई और नुकसान का आकलन शुरू किया गया। प्रशासन के सामने क्षतिग्रस्त सार्वजनिक संपत्तियों की स्थिति का पता लगाने और शहरों में सामान्य व्यवस्था बहाल करने की चुनौती बनी हुई है।
दो हजार से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी
फ्रांस के गृह मंत्री के मुताबिक, हिंसक घटनाओं के दौरान दो हजार से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान 600 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। पेरिस में एक प्रदर्शनकारी की दिल का दौरा पड़ने से मौत होने की भी जानकारी दी गई।
गिरफ्तारियों और पुलिसकर्मियों के घायल होने से हिंसा की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। रविवार को कई शहरों में हालात अपेक्षाकृत शांत रहे, लेकिन तोड़फोड़ और आगजनी से हुए नुकसान के निशान बने रहे।
सरकार के सामने कानून-व्यवस्था की चुनौती
फ्रांस में हिंसा के बाद प्रशासन को एक ओर सार्वजनिक व्यवस्था बहाल करनी है, तो दूसरी ओर महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े असंतोष का सामना करना है। प्रदर्शनों ने सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को लेकर लोगों की नाराजगी उजागर की है।
आने वाले दिनों में स्थिति किस दिशा में जाएगी, यह प्रशासन की कार्रवाई और विरोध प्रदर्शनों के आगे के घटनाक्रम पर निर्भर करेगा। फिलहाल प्रभावित शहरों में नुकसान का आकलन और सामान्य जनजीवन बहाल करने का काम प्राथमिकता बना हुआ है।











