Home » ताजा खबर » RBI की चेतावनी: वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बनी बड़ी चुनौती

RBI की चेतावनी: वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बनी बड़ी चुनौती

भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के विचारों से यह चिंता सामने आई है।

MPC की बैठक से अगस्त 2026 तक हुई थी। बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया। हालांकि, समिति के सदस्यों ने वैश्विक घटनाक्रम, पश्चिम एशिया में जारी सघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में सभावित उतार-चढ़ाव को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत बताई।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ रहा दबाव

RBI के अनुसार, वर्ष 2026 में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य कई चुनौतियों से घिरा रह सकता है। शेयर बाजारों में अस्थिरता, महंगाई की चिंता और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की कमजोर सार्वजनिक वित्तीय स्थिति वैश्विक आर्थिक माहौल को प्रभावित कर रही है।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ऊर्जा बाजार पर भी दबाव बना हुआ है। अस्थिर कच्चे तेल की कीमतें भारत जैसी आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए खास चिंता का विषय हैं। अचानक तनाव बढ़ने की स्थिति में तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, लेकिन महंगाई पर नजर

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक के दौरान कहा कि वैश्विक अस्थिरता, पश्चिम एशिया का संघर्ष और अनियमित मानसून जैसी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। . प्रतिशत की वृद्धि दर इसकी मजबूती को दर्शाती है।

हालांकि, महंगाई को लेकर केंद्रीय बैंक सतर्क है। फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी को मुख्य रूप से खाद्य और ईंधन से जुड़े आपूर्ति पक्ष के दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है। RBI का मानना है कि ब्याज दरों में बदलाव से पहले महंगाई की दिशा को लेकर अधिक स्पष्टता का इंतजार करना उचित है।

महंगाई बढ़ी तो सख्त हो सकती है नीति

RBI ने खाद्य पदार्थों, ईंधन और अन्य कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी के जोखिम पर भी चिंता जताई है। यदि इन कारणों से महंगाई व्यापक स्तर पर फैलती है और इसके स्थायी प्रभाव दिखाई देते हैं, तो मौद्रिक नीति को सख्त करने की जरूरत पड़ सकती है।

फिलहाल RBI का रुख सावधानी भरा है। केंद्रीय बैंक आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के साथ-साथ महंगाई और वैश्विक जोखिमों पर लगातार नजर बनाए हुए है।

संबंधित समाचार
E-Paper image 2