जामनगर, गुजरात
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत अंबानी का वन्यजीव संरक्षण प्रोजेक्ट ‘वंतारा’ इन दिनों काफी चर्चा में है। गुजरात के जामनगर में स्थित यह विशाल परिसर घायल, बेसहारा और लुप्तप्राय वन्यजीवों के बचाव, उपचार और पुनर्वास के लिए विकसित किया गया है। करीब 3,500 एकड़ में फैले इस परिसर को एशिया के सबसे बड़े निजी वन्यजीव संरक्षण केंद्रों में शामिल किया जाता है।
वंतारा का उद्देश्य सामान्य चिड़ियाघरों की तरह पर्यटकों को जानवर दिखाना नहीं, बल्कि संकट में पड़े वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। यहां हाथी, बड़ी बिल्लियां, मगरमच्छ, अजगर और कई अन्य प्रजातियों के जानवरों के लिए बचाव, उपचार और पुनर्वास की सुविधाएं विकसित की गई हैं।
कैसे शुरू हुआ वंतारा?
वंतारा परियोजना जामनगर के रिलायंस परिसर के आसपास विकसित की गई है। इसके प्रमुख हिस्सों में 2013 में शुरू हुआ ‘राधे कृष्ण मंदिर एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट’ और 2019 में स्थापित ‘ग्रीन्स जूलॉजिकल, रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर’ शामिल हैं।
इन संस्थानों के माध्यम से घायल और संकटग्रस्त जानवरों को बचाने, उनका इलाज करने और उन्हें सुरक्षित वातावरण देने का काम किया जाता है। परियोजना में पशु चिकित्सा विशेषज्ञों, देखभाल करने वाले कर्मचारियों और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का इस्तेमाल किया जाता है।
हजारों जानवरों की देखभाल
वंतारा में बड़ी संख्या में वन्यजीवों को रखा गया है। परियोजना से जुड़े विवरणों के अनुसार यहां हाथियों के लिए विशेष देखभाल सुविधाएं मौजूद हैं। इसके अलावा बड़ी बिल्लियों, मगरमच्छों, अजगरों और अन्य वन्यजीवों के लिए भी अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं।
परिसर का डिजाइन जानवरों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। उपचार से लेकर भोजन, पुनर्वास और दैनिक देखभाल तक के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं।
क्या आम लोगों के लिए खुला है वंतारा?
आम चिड़ियाघरों से अलग वंतारा फिलहाल सामान्य पर्यटक स्थल के रूप में संचालित नहीं होता। यहां आने के लिए आम जनता के लिए नियमित टिकट व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों का संरक्षण और पुनर्वास है, न कि पर्यटन।
यही वजह है कि वंतारा को लेकर ‘निजी चिड़ियाघर’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर किया जाता है, लेकिन इसकी गतिविधियां सामान्य सार्वजनिक चिड़ियाघर से काफी अलग हैं।
परियोजना पर कितना खर्च?
मीडिया रिपोर्टों में वंतारा परियोजना की शुरुआती लागत करीब 1,200 करोड़ रुपये से 2,000 करोड़ रुपये के बीच बताई गई है। इसके अलावा परियोजना के संचालन पर हर साल भी बड़ी राशि खर्च होने का अनुमान लगाया जाता है। हालांकि, इन आंकड़ों को मीडिया रिपोर्टों में बताए गए अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
अनंत अंबानी की इस पहल को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बड़े निजी निवेश के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। वंतारा का दावा है कि इसका फोकस घायल और संकटग्रस्त जानवरों को बचाने, उनका उपचार करने और उन्हें बेहतर जीवन देने पर है।
इस तरह जामनगर में विकसित वंतारा सिर्फ विशाल क्षेत्रफल की वजह से चर्चा में नहीं है, बल्कि वन्यजीव बचाव और पुनर्वास के लिए विकसित अपने बुनियादी ढांचे के कारण भी खास पहचान बना रहा है।











