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बीसीसीआई ने हाई कोर्ट में बताया, क्यों राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम-2025 फिलहाल क्रिकेट पर लागू नहीं

कटक, ओडिशा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम-2025 को लेकर अपनी कानूनी स्थिति स्पष्ट की है। उड़ीसा हाई कोर्ट में दाखिल हलफनामे में बीसीसीआई ने कहा है कि अधिनियम लागू होने के बावजूद इसके प्रावधान मौजूदा समय में क्रिकेट और बोर्ड पर लागू नहीं होते। बोर्ड का तर्क है कि क्रिकेट को अभी तक कानून के तहत ‘डेजिगनेटेड स्पोर्ट्स’ यानी निर्धारित खेल के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है।

बीसीसीआई ने यह जवाब ओडिशा क्रिकेट संघ (ओसीए) से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया। बोर्ड ने 19 अगस्त को अदालत में हलफनामा दाखिल किया था। बीसीसीआई की ओर से वरिष्ठ प्रबंधक (कानूनी) मेलिंडा कोलाको ने जस्टिस सावित्री राठो की अदालत में बोर्ड का पक्ष रखा।

हलफनामे में कहा गया कि केवल संसद द्वारा राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम पारित करने और उसके लागू हो जाने से उसके प्रावधान स्वतः बीसीसीआई या क्रिकेट पर प्रभावी नहीं हो जाते। इसके लिए क्रिकेट को पहले इस अधिनियम के तहत निर्धारित खेल घोषित करना जरूरी है। जब तक केंद्र सरकार इस संबंध में अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक कानून के प्रावधान बोर्ड पर लागू नहीं होंगे।

ओडिशा क्रिकेट संघ के मामले में बीसीसीआई ने चुनावों को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया। बोर्ड ने कहा कि ओसीए को जल्द चुनाव कराने चाहिए। बीसीसीआई के अनुसार, पदाधिकारियों का लंबे समय तक पद पर बने रहना सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और संघ के अपने नियमों के अनुरूप नहीं है।

बीसीसीआई के हलफनामे में यह भी साफ किया गया कि वर्तमान में बोर्ड और उसके राज्य क्रिकेट संघ लोढ़ा समिति की सिफारिशों तथा सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर तैयार संविधान के अनुसार काम कर रहे हैं। यही व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक क्रिकेट को नए कानून के तहत औपचारिक रूप से निर्धारित खेल के रूप में अधिसूचित नहीं किया जाता।

मौजूदा संविधान के अनुसार कोई पदाधिकारी तीन वर्ष के कुल तीन कार्यकाल, यानी अधिकतम नौ वर्ष तक पद पर रह सकता है। हालांकि लगातार दो कार्यकाल, यानी छह वर्ष पूरे करने के बाद उसे तीन वर्ष के कूलिंग ऑफ पीरियड से गुजरना अनिवार्य है। इसके बाद ही वह फिर से किसी पद के लिए पात्र हो सकता है।

केंद्र सरकार राष्ट्रीय खेल प्रशासन में एक समान व्यवस्था लागू करने के उद्देश्य से विभिन्न खेल महासंघों को नए कानून के दायरे में लाने की दिशा में कदम उठा रही है। अधिनियम में राष्ट्रीय खेल बोर्ड से मान्यता लेने का प्रावधान भी किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, खेल संघों को दिसंबर तक आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा गया है।

यदि कोई खेल संघ नए प्रावधानों के अनुसार आवश्यक मान्यता प्रक्रिया पूरी नहीं करता है, तो उसके सामने ‘भारत’ शब्द के इस्तेमाल से जुड़े अधिकार और मान्यता के सवाल भी खड़े हो सकते हैं। हालांकि बीसीसीआई का मामला फिलहाल अलग है, क्योंकि क्रिकेट को अभी तक अधिनियम के तहत निर्धारित खेल घोषित नहीं किया गया है।

इस तरह उड़ीसा हाई कोर्ट में दाखिल बीसीसीआई के हलफनामे से यह स्पष्ट हो गया है कि राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम-2025 लागू होने के बावजूद वर्तमान कानूनी स्थिति में बोर्ड और उसके राज्य संघों पर इसके प्रावधान लागू नहीं होते। फिलहाल बीसीसीआई का संचालन उसके मौजूदा संविधान और सुप्रीम कोर्ट से तय व्यवस्था के तहत ही जारी रहेगा।

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