लंदन, इंग्लैंड।
वैज्ञानिकों ने चावल के दाने के आकार की एक माइक्रोचिप पर ऐसा अनोखा प्रकाशीय सिस्टम विकसित किया है, जिसे भविष्य की तेज और अधिक क्षमता वाली 6जी तकनीक के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सिस्टम की मदद से एक साथ प्रकाश की कई सटीक और समान दूरी वाली आवृत्तियां उत्पन्न की जा सकती हैं। इन आवृत्तियों को मिलीमीटर-वेव सिग्नल में बदलकर वायरलेस संचार में इस्तेमाल करने की संभावना है।
यह शोध ब्रिटेन की लाफबरो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने किया है। शोध के नतीजे हाल में प्रतिष्ठित जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को समझाने के लिए इसे ‘चिप पर इंद्रधनुष’ जैसा बताया है। दरअसल, इसमें एक माइक्रोकांब तैयार किया गया है। सामान्य इंद्रधनुष में प्रकाश की अलग-अलग तरंगदैर्ध्य अलग-अलग रंगों के रूप में दिखाई देती हैं। माइक्रोकांब में भी कई प्रकाशीय आवृत्तियां मौजूद होती हैं, लेकिन वे लगातार एक-दूसरे में मिलती नहीं हैं। इसके बजाय वे कंघी के दांतों की तरह सटीक और समान अंतराल पर व्यवस्थित रहती हैं। प्रयोग में तैयार हुआ प्रकाश मानव आंखों को दिखाई नहीं देता।
माइक्रोकांब तैयार करने के लिए वैज्ञानिकों ने लेजर प्रकाश को माइक्रोरेजोनटर में भेजा। यह चिप पर बनी बेहद छोटी संरचना होती है, जिसमें प्रकाश को लगातार घूमने दिया जा सकता है। लाफबरो यूनिवर्सिटी की टीम ने माइक्रोरेजोनटर को ऑप्टिकल फाइबर के एक बड़े लूप से जोड़ दिया। इसके बाद लेजर प्रकाश दोनों प्रणालियों के बीच लगातार घूमता रहा। इस नई व्यवस्था से माइक्रोकांब की अवस्थाओं को उत्पन्न करना आसान हुआ और उनकी स्थिरता भी बनी रही।
शोध की सबसे अहम उपलब्धि यह है कि वैज्ञानिकों ने केवल एक मिलीमीटर-वेव आवृत्ति नहीं, बल्कि कई सटीक रूप से व्यवस्थित आवृत्तियां एक साथ तैयार करने का प्रदर्शन किया है। भविष्य में प्रत्येक आवृत्ति को अलग वायरलेस संचार चैनल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे एक ही सिस्टम के माध्यम से समानांतर रूप से अधिक जानकारी भेजने की संभावना बढ़ सकती है।
मिलीमीटर-वेव आवृत्तियां भविष्य की वायरलेस प्रणालियों के लिए ज्यादा बैंडविड्थ उपलब्ध करा सकती हैं। इसका मतलब है कि अधिक डाटा को तेज गति से भेजने की क्षमता विकसित हो सकती है। यही वजह है कि इस तकनीक को भविष्य के 6जी नेटवर्क के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
लाफबरो यूनिवर्सिटी के डा. ल्यूक पीटर्स के अनुसार, दुनिया में डाटा की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। भविष्य में लोगों और विभिन्न डिजिटल उपकरणों को पहले से ज्यादा जानकारी, तेज गति और बेहतर रिजोल्यूशन के साथ भेजने तथा प्राप्त करने की जरूरत होगी। मिलीमीटर-वेव तकनीक इस बढ़ती मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अभी प्रयोगशाला स्तर की तकनीक है। माइक्रोचिप का आकार भले ही चावल के दाने जितना हो, लेकिन पूरी प्रणाली अभी एक टेबलटाप प्रयोगशाला सेटअप है। इसे व्यावहारिक 6जी नेटवर्क में इस्तेमाल करने से पहले और तकनीकी विकास तथा परीक्षण की आवश्यकता होगी।
इस शोध के संभावित उपयोग केवल संचार क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। सटीक मिलीमीटर-वेव आवृत्तियों का इस्तेमाल रडार, स्पेक्ट्रोस्कोपी, खगोलीय उपकरणों और अत्यधिक सटीक टाइमिंग सिस्टम में भी किया जा सकता है। इनके जरिए पदार्थों का अधिक सटीक अध्ययन और ब्रह्मांड से जुड़े बेहद सूक्ष्म माप लेने में मदद मिल सकती है।
शोधकर्ता अब इस पूरी प्रणाली का आकार घटाने और ऊर्जा खपत कम करने पर काम कर रहे हैं। भविष्य में इसके छोटे और ऊर्जा-कुशल संस्करण उन उपकरणों के लिए उपयोगी हो सकते हैं, जहां जगह, वजन और बिजली की खपत सीमित होती है। ऐसे में उपग्रहों और अंतरिक्ष आधारित संचार प्रणालियों के लिए भी यह तकनीक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।












