नई दिल्ली, दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने वाले निर्वाचित उम्मीदवारों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि आम नागरिक भी ऐसे मामलों में आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत को केवल इस आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता कि उसे चुनाव आयोग या किसी अधिकृत सरकारी अधिकारी ने दर्ज नहीं कराया है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125ए के तहत चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने के आरोपों पर आम नागरिक की शिकायत पर भी विचार किया जा सकता है।
धारा 195 की पाबंदी नहीं बनेगी बाधा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 195 की पाबंदी इस प्रकार की शिकायत दर्ज कराने में बाधा नहीं है। इस फैसले से चुनावी हलफनामों में दी गई जानकारी को लेकर शिकायत करने के कानूनी रास्ते की स्थिति स्पष्ट हुई है।
अदालत ने साथ ही चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति किसी निर्वाचित उम्मीदवार को परेशान करने के उद्देश्य से झूठी या निराधार शिकायत दर्ज कराता है, तो सक्षम मजिस्ट्रेट उसके खिलाफ उचित कार्रवाई कर सकते हैं। इस तरह अदालत ने शिकायत दर्ज कराने के अधिकार के साथ उसके दुरुपयोग को रोकने पर भी जोर दिया है।
2023 के चुनाव से जुड़ा है मामला
यह फैसला कर्नाटक के निवासी राजकुमार माडकी की अपील पर आया। उन्होंने बीदर विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित विधायक शैलेंद्र बेलदाले पर आरोप लगाया था कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे में आवासीय पते के संबंध में गलत जानकारी दी गई थी।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आम नागरिक की ओर से शिकायत दर्ज कराने के अधिकार पर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की। फैसला चुनावी हलफनामों में उम्मीदवारों की ओर से दी जाने वाली जानकारी की सत्यता और जवाबदेही के लिहाज से अहम है।
नेताओं के लिए बढ़ेगी जवाबदेही
चुनावी हलफनामे में उम्मीदवार अपनी निर्धारित जानकारियां प्रस्तुत करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यदि किसी नागरिक को लगता है कि किसी निर्वाचित उम्मीदवार ने गलत जानकारी दी है या महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए हैं, तो वह संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत शिकायत दर्ज करा सकता है।
हालांकि, आरोप लगना और अपराध साबित होना अलग-अलग बातें हैं। शिकायत पर आगे की कार्रवाई तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी। अदालत ने झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई का विकल्प भी खुला रखा है।












