नई दिल्ली, भारत। केंद्र सरकार किसानों को मिलने वाली सब्सिडी वाली खाद की बिक्री और वितरण व्यवस्था में बदलाव करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, किसानों को उनकी जमीन और फसल के आधार पर खाद का कोटा दिया जा सकता है। इस कोटे को QR कोड से जोड़ने की योजना है, जबकि खाद लेने के दौरान आधार के जरिए किसान की पहचान सत्यापित की जा सकती है। सरकार का उद्देश्य खाद सब्सिडी के बढ़ते बोझ को नियंत्रित करने के साथ वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है।
इस योजना के लिए एग्रीस्टैक आधारित ढांचा प्रस्तावित है। इसके तहत खेती और जमीन से जुड़ी जानकारी के आधार पर किसानों की खाद संबंधी जरूरत निर्धारित करने की व्यवस्था बनाई जा सकती है। किसानों को उनके क्षेत्र में तय किए गए खाद विक्रेताओं के माध्यम से खाद उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव है। इससे खाद की बिक्री पर निगरानी रखने और यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि सब्सिडी का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचे।
खाद की कालाबाजारी रोकने पर जोर
खाद पर सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी का उद्देश्य किसानों को खेती के लिए जरूरी उर्वरक सस्ती दरों पर उपलब्ध कराना है। हालांकि, प्रस्तावित नई व्यवस्था का एक अहम लक्ष्य खाद की कालाबाजारी, गैर-कृषि उपयोग और दूसरे देशों में तस्करी जैसी समस्याओं को रोकना भी है।
QR कोड आधारित कोटा व्यवस्था लागू होने पर किसानों को निर्धारित मात्रा में खाद उपलब्ध कराने और बिक्री का रिकॉर्ड रखने में आसानी हो सकती है। इससे खाद की मांग और वितरण के बीच बेहतर तालमेल बनाने में भी मदद मिलने की संभावना है। हालांकि, योजना के लागू होने, कोटा तय करने के मानकों और किसानों के लिए इसकी प्रक्रिया के बारे में अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
दिसंबर में राज्यों के साथ चर्चा संभव
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर के अंतिम सप्ताह में आयोजित होने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों के सम्मेलन में इस प्रस्ताव पर चर्चा कर सकते हैं। केंद्र सरकार राज्यों से खाद बिक्री के नए ढांचे को अपनाने का आग्रह कर सकती है।
चूंकि इस व्यवस्था को देशभर में लागू करने का प्रस्ताव है, इसलिए राज्यों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। खाद विक्रेताओं, किसानों और संबंधित सरकारी विभागों के बीच समन्वय भी जरूरी होगा। योजना लागू होने पर खाद वितरण की निगरानी मजबूत करने और सब्सिडी के संभावित दुरुपयोग को कम करने में मदद मिल सकती है।











