**नई दिल्ली, दिल्ली**
झारखंड कंबाइंड सिविल सर्विसेज (JCCS) प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार को अहम सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत के समक्ष दायर याचिका में मामले की जांच राज्य सीआईडी के बजाय केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से स्वतंत्र और समयबद्ध तरीके से कराने की मांग की गई है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करेगी। याचिका में झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा-2025 की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गई हैं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि परीक्षा से जुड़े कथित मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए जांच एजेंसी का स्वतंत्र होना जरूरी है। इसी आधार पर राज्य सीआईडी से जांच हटाकर सीबीआई को सौंपने की मांग की गई है। याचिका में परीक्षा से जुड़े अधिकारियों और परीक्षा एजेंसियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता भी बताई गई है।
याचिका के अनुसार, कथित गड़बड़ियों की जांच परीक्षा के किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। पूरी परीक्षा प्रक्रिया की चरणबद्ध जांच की जानी चाहिए। इसमें प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया, परीक्षा का संचालन, परीक्षा केंद्रों से जुड़ी व्यवस्थाएं और परिणाम प्रकाशित करने की प्रक्रिया शामिल करने की मांग की गई है।
मामले से संबंधित भौतिक और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट से निर्देश जारी करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों का संरक्षण आवश्यक है।
याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल आरोप लगने के आधार पर परीक्षा को रद्द करना उचित नहीं होगा। पहले आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और उसके बाद तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय लिया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की सोमवार की सुनवाई को इस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि शीर्ष अदालत जांच को लेकर क्या निर्देश देती है और याचिका पर आगे किस दिशा में कार्रवाई होती है।











