तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ आया है। तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के अध्यक्ष विजय पांच दिनों की लगातार राजनीतिक हलचल, चार अहम बैठकों और सहयोगी दलों के साथ गहन बातचीत के बाद आखिरकार बहुमत जुटाने में सफल रहे। इसके साथ ही वे आज चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में सुबह 10 बजे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
लगभग दो वर्ष पहले बनी TVK ने इस बार विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 234 में से 108 सीटें जीतीं, लेकिन बहुमत के लिए आवश्यक 118 के आंकड़े से 10 सीटें पीछे रह गई। इसके बाद शुरू हुआ समर्थन जुटाने का दौर, जिसमें कई राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले।
सबसे पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने विजय को समर्थन दिया। कांग्रेस के पांच विधायकों के समर्थन के बावजूद बहुमत का आंकड़ा अधूरा था। इसके बाद वामपंथी दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) भी विजय के साथ आ गए, जिससे गठबंधन मजबूत हुआ लेकिन संख्या अभी भी 118 से कम थी।
राजनीतिक तस्वीर उस समय बदली जब विदुथलाई चिरुथाइगल काची ने समर्थन की घोषणा की। इसके बाद इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के समर्थन से गठबंधन का आंकड़ा 120 विधायकों तक पहुंच गया, जो बहुमत के लिए पर्याप्त है।
इन घटनाक्रमों के बीच विजय ने राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से चार बार मुलाकात की। प्रारंभिक बैठकों में राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि बहुमत का ठोस प्रमाण आवश्यक है। हालांकि, अंतिम बैठक में सहयोगी दलों के समर्थन पत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद राज्यपाल ने विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर दिया।
राज्यपाल ने विजय को निर्देश दिया है कि वे 13 मई तक या उससे पहले विधानसभा में विश्वास मत हासिल करें। यह नई सरकार के लिए पहला बड़ा परीक्षण होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग 60 वर्षों में पहली बार तमिलनाडु में इस तरह की गैर-पारंपरिक राजनीतिक स्थिति बनी है, जहां एक नई पार्टी ने तेजी से उभरकर सत्ता हासिल की है। विजय के नेतृत्व में बनने वाली सरकार से जनता को नई नीतियों और बदलावों की उम्मीद है।
अब सभी की नजरें शपथ ग्रहण समारोह और आगामी विश्वास मत पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि यह नई राजनीतिक शुरुआत कितनी स्थिर और प्रभावी साबित होती है।











