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तालिबान से ज्यादा ताकतवर सेना, फिर भी अफगानिस्तान में जमीनी फौज भेजने से क्यों बच रहा पाकिस्तान?

इस्लामाबाद, पाकिस्तान

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड लाइन पर तनाव लगातार बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों की सेनाओं और तालिबान लड़ाकों के बीच कई बार हिंसक झड़पें हो चुकी हैं। अक्तूबर में पाकिस्तानी वायु सेना की ओर से अफगानिस्तान के अंदर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर हवाई हमले किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया।

सैन्य क्षमता के मामले में पाकिस्तान अफगानिस्तान से काफी आगे है। इसके बावजूद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में व्यापक जमीनी अभियान शुरू करने के बजाय मुख्य रूप से अपनी हवाई ताकत का इस्तेमाल किया है। इसके पीछे सीमा की जटिल स्थिति और तालिबान की गुरिल्ला युद्ध रणनीति अहम कारण माने जा रहे हैं।

दोनों देशों की सैन्य ताकत में बड़ा अंतर

ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स में पाकिस्तान 14वें स्थान पर है, जबकि अफगानिस्तान 121वें स्थान पर है। पाकिस्तान के पास आधुनिक सैन्य संसाधनों के साथ वायु सेना और परमाणु हथियार भी हैं।

इसके मुकाबले तालिबान के पास कोई संगठित वायु सेना नहीं है। उसके लड़ाके मुख्य रूप से अमेरिका और पूर्व अफगान सेना द्वारा छोड़े गए हथियारों तथा गुरिल्ला युद्ध की रणनीति पर निर्भर हैं।

जमीनी अभियान में चुनौती

सैन्य ताकत में अंतर होने के बावजूद अफगानिस्तान में जमीनी अभियान पाकिस्तान के लिए आसान नहीं होगा। डूरंड लाइन के आसपास का इलाका बेहद कठिन और पहाड़ी है। ऐसे क्षेत्र में सैन्य अभियानों के दौरान सैनिकों के लिए भौगोलिक परिस्थितियां बड़ी चुनौती बन सकती हैं।

तालिबान लड़ाकों को भी लंबे समय से गुरिल्ला युद्ध का अनुभव रहा है। वे पारंपरिक सैन्य टकराव के बजाय छोटे समूहों में हमला करने और कठिन इलाकों का इस्तेमाल करने की रणनीति अपना सकते हैं।

TTP के ठिकानों पर हवाई कार्रवाई

पाकिस्तान का मुख्य आरोप तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को लेकर है। इस संगठन के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के अंदर हवाई कार्रवाई का सहारा लिया है।

पाकिस्तान के लिए हवाई हमले जमीनी अभियान की तुलना में सीमित सैन्य संसाधनों के इस्तेमाल का विकल्प भी देते हैं। दूसरी ओर, अफगानिस्तान में बड़े स्तर पर जमीनी सैनिक भेजने से संघर्ष के लंबे समय तक चलने की संभावना बढ़ सकती है।

इसी वजह से सैन्य ताकत में बढ़त होने के बावजूद पाकिस्तान फिलहाल अफगानिस्तान में व्यापक जमीनी अभियान से बचते हुए हवाई शक्ति और सीमा पर सैन्य दबाव के जरिए अपनी रणनीति आगे बढ़ा रहा है।

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